इंदौर में दूषित पानी से फैल रहा उल्टी-दस्त का प्रकोप
इंदौर में स्वास्थ्य संकट
इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में उल्टी और दस्त के गंभीर प्रकोप ने प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रयोगशाला परीक्षणों से यह स्पष्ट हुआ है कि दूषित पेयजल इस संकट का मुख्य कारण है। अब तक नौ लोगों की जान जा चुकी है और 1,400 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे आपातकालीन स्थिति करार दिया है और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
दूषित जल से फैलने वाला संक्रमण
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इंदौर के भगिरथपुरा क्षेत्र में यह प्रकोप पीने के पानी के दूषित होने के कारण फैला है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में पानी में संक्रमण की पुष्टि हुई है। हालांकि, रिपोर्ट के तकनीकी विवरण साझा नहीं किए गए हैं, लेकिन कारण को लेकर कोई संदेह नहीं है।
पाइपलाइन में रिसाव का मामला
प्रशासनिक जांच में यह सामने आया है कि भगिरथपुरा में मुख्य पेयजल पाइपलाइन में रिसाव था। यह लीकेज एक पुलिस चौकी के पास उस स्थान पर पाया गया, जहां पाइपलाइन के ऊपर शौचालय बना हुआ था। अधिकारियों का कहना है कि इसी कारण गंदगी पानी में मिल गई और इलाके में सप्लाई होने वाला पानी दूषित हो गया।
प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया
अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि पूरे क्षेत्र की जल आपूर्ति लाइन की जांच की जा रही है, ताकि कहीं और रिसाव न हो। जांच के बाद गुरुवार को पाइपलाइन से साफ पानी की आपूर्ति बहाल कर दी गई। एहतियात के तौर पर लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, राज्यभर के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की योजना बनाई गई है।
मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई
इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग का कहना है कि स्थानीय लोग कई दिनों से दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं की गई। आयोग ने मौतों को गंभीर लापरवाही का परिणाम मानते हुए जवाब मांगा है।
मरीजों की स्थिति और स्वास्थ्य सर्वेक्षण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, भगिरथपुरा के 1,714 घरों में सर्वेक्षण कर 8,571 लोगों की जांच की गई। इनमें से 338 लोगों में हल्के लक्षण पाए गए, जिन्हें घर पर प्राथमिक उपचार दिया गया। पिछले आठ दिनों में 272 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से 71 को छुट्टी मिल चुकी है। वर्तमान में 201 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 32 आईसीयू में हैं।
