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मध्य प्रदेश में किसानों के लिए मुआवजे में चार गुना वृद्धि का ऐतिहासिक निर्णय

मध्य प्रदेश में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिसमें भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को चार गुना बढ़ाने का ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसे किसानों के हित में ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस फैसले से विकास कार्यों में तेजी आएगी और किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी। जानें इस निर्णय के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभाव।
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मध्य प्रदेश में किसानों के लिए मुआवजे में चार गुना वृद्धि का ऐतिहासिक निर्णय

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण निर्णय


भोपाल: मध्य प्रदेश में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को चार गुना बढ़ाने का ऐलान किया है। इसे किसानों के हित में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।


पहले राज्य में भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों को उनकी जमीन की कीमत का दोगुना मुआवजा मिलता था। यह व्यवस्था भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार थी, लेकिन अब मुआवजे के फैक्टर को 1 से बढ़ाकर 2 कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को गाइडलाइन वैल्यू का सीधे चार गुना तक भुगतान प्राप्त होगा।


सरकार का दृष्टिकोण

सरकार का क्या है कहना?


सरकार का कहना है कि गाइडलाइन रेट अक्सर बाजार मूल्य से कम होते हैं, जिससे किसानों को अपनी जमीन देने में आर्थिक नुकसान होता था। यही कारण है कि कई बार सड़क, रेल लाइन, सिंचाई परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों में देरी होती थी। अब सरकार को उम्मीद है कि बढ़े हुए मुआवजे से किसान स्वेच्छा से अपनी जमीन देने के लिए आगे आएंगे।


इस निर्णय का प्रभाव

इस फैसले का क्या पड़ेगा असर?


इस निर्णय का सीधा प्रभाव राज्य के विकास कार्यों पर पड़ेगा। मध्य प्रदेश में हर साल सड़क, पुल, सिंचाई और एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स पर लगभग 70,000 से 75,000 करोड़ रुपये का निवेश होता है। पिछले तीन वर्षों में लोक निर्माण विभाग ने लगभग 10,000 करोड़ रुपये का मुआवजा किसानों को दिया था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह राशि बढ़कर लगभग 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।


फायदे और विकास

क्या-क्या होगें इसके फायदे?


सरकार का मानना है कि इससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी, वहीं विकास परियोजनाएं भी समय पर पूरी हो सकेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है और यह निर्णय विकास और किसान हितों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।