मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर घोषित किया, पूजा शुरू
भोजशाला परिसर का मंदिर घोषित होना
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने विवादास्पद भोजशाला-कमल मौला परिसर को शुक्रवार को आधिकारिक रूप से मंदिर के रूप में मान्यता दी। इसके बाद से परिसर में पूजा-अर्चना का कार्य प्रारंभ हो गया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि माता की मूर्ति की पूजा की गई और परिसर को फूलों से सजाया गया है।
सुरक्षा के इंतजाम
मंदिर परिसर में भगवा झंडा फहराया गया, जिसे सनातन धर्म का प्रतीक माना जाता है। कोर्ट के निर्णय के बाद अब हर दिन पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा। हालांकि, मुस्लिम समुदाय इस फैसले से असंतुष्ट है, जिसके चलते सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
अदालत का निर्णय
अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए परिसर को राजा भोज का बताया, जहां पहले विद्यालय था और वाग्देवी की पूजा होती थी। ASI के वकील ने कहा कि भोजशाला को एक संरक्षित स्मारक के रूप में मान्यता दी गई है, जो 1904 से लागू है। इसका मतलब है कि परिसर की देखरेख की जिम्मेदारी ASI की होगी।
ASI ने पहले आदेश में हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति दी थी और मुस्लिम समुदाय को नमाज पढ़ने की इजाजत दी थी। लेकिन अब अदालत ने ASI के पुराने आदेश में बदलाव करते हुए परिसर को पूरी तरह से मंदिर घोषित कर दिया है। हिंदू पक्ष के वकील ने मांग की है कि मंदिर की मूर्ति, जो वर्तमान में लंदन के एक म्यूजियम में है, उसे वापस लाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी
हाई कोर्ट के इस निर्णय पर मुस्लिम पक्ष में नाराजगी का माहौल है। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की बात कही है। अध्यक्ष अब्दुल समद इस मामले में मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस फैसले पर अपनी असहमति व्यक्त की है और आशा जताई है कि हाई कोर्ट अपने आदेश को पलट देगा। उन्होंने इसे बाबरी मस्जिद से संबंधित मामले से जोड़कर देखा है।
