मथुरा : नंदी पर सवार हुए औघड़दानी भगवान शिव, बारात में नाचे भूत-प्रेत
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मथुरा, 26 फरवरी(हि.स.)। कान्हा की जन्मभूमि में भगवान भूत भावन भोले नाथ की बारात बड़े ही थाट बाट के साथ निकाली गई। श्रीकृष्ण जन्म भूमि से निकाली गई भगवान शंकर की बारात में शिव के गण भूत, प्रेत, संत, देवता भेष धारण कर नाचते गाते हुए निकले। भगवान शिव की भक्ति के रंग में सराबोर होकर शिव भक्त भगवान शंकर के जयकारों से जयघोष करते नजर आए।
शिव बारात, महाशिवरात्रि के अवसर पर बुधवार शाम श्रीकृष्ण जन्मस्थान से प्रारंभ होकर शहर के मुख्य मार्गों से होकर निकाली गई, शिव बारात के निकलते समय श्री कृष्ण की नगरी शिवमय हो गई। श्री कृष्ण जन्म भूमि के मुख्य द्वार से भगवान शिव की बारात का आरंभ हुआ जो मथुरा शहर के मुख्य मार्ग मंडी रामदास होते हुए चौक बाजार, स्वामी घाट, विश्राम घाट होते हुए छत्ता बाजार, होलीगेट होकर कोतवाली रोड, भरतपुर गेट से होते हुए श्री कृष्ण जन्म भूमि पर पहुंची। मथुरा शहर वासियों ने जगह जगह भगवान शिव की बारात पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। भगवान शिव की बारात में दूल्हा बने भगवान शंकर अपने परम प्रिय नंदी पर विराजमान होकर निकले साथ में तरह तरह से सज कर उनके बाराती नाचते गाते चल रहे थे। शिव की बारात में चल रहे बारातियों ने खास कर बच्चों में अलग ही जोश भर दिया। दुर्लभ शिव बारात के आज अनूठे दर्शन पाकर बच्चे, युवा बारात के साथ भक्ति से ओत-प्रोत एवं शिवगणों की ताल में ताल मिलाकर नृत्य करते हुये चल रहे थे, वहीं बुजुर्ग एवं महिलायें बड़े ही कौतूहल एवं श्रद्धाभाव से इस बारात को निहार रहे थे। सभी के मन में खुशी थी। जहाँ से भगवान शिव की बारात निकली वहीं से वृहद मात्रा में पुष्पवर्षा हो रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि इन्द्रदेव मेघ बूंदों के स्थान पर पुष्पवर्षा कर रहे हों। नृत्य करते शिवभक्त एवं भगवान शिव के गण, भक्तों में श्रद्धा के साथ-साथ भाव मिश्रित सिरहन भी पैदा कर रहे थे। जन्मभूमि पर भगवान शिव की बारात प्रारम्भ से पूर्व औघड़दानी भगवान शिव की आरती श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी द्वारा की गयी।
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हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार