पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी रोकने के लिए नया संशोधन
पंजाब सरकार का नया कदम
पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मामलों में सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए नए कानून बनाने के बजाय, 2008 के 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट' में संशोधन किया जा रहा है।
नया कानून और उसकी प्रक्रिया
पंजाब सरकार ने पहले 'पवित्र धर्मग्रंथों के विरुद्ध अपराध निवारण अधिनियम-2025' का मसौदा तैयार किया था, जिसे जुलाई 2025 में विधानसभा में पेश किया गया। इस नए कानून में न केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब, बल्कि अन्य धर्मों के पवित्र ग्रंथों की बेअदबी को भी शामिल किया गया था। इसके बाद इसे विधायक डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर की अध्यक्षता वाली सिलेक्ट कमेटी को भेजा गया।
कमेटी की रिपोर्ट
हाल ही में कमेटी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी है, जिसमें कई विद्वानों के सुझाव शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट काफी गहन है और सरकार इस पर और विचार करना चाहती है। चुनावी वर्ष होने के कारण, सरकार विवादास्पद कदम उठाने से बचना चाहती है, इसलिए पुराने एक्ट में सीमित लेकिन प्रभावी संशोधन करने का निर्णय लिया गया है। 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम-2008' को पहले अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान लागू किया गया था।
संशोधन के प्रमुख बिंदु
सरकार अब इस एक्ट के कुछ महत्वपूर्ण खंडों में संशोधन कर रही है। विद्वानों और कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श के बाद, बेअदबी के लिए सजा को 10 साल से उम्रकैद तक बढ़ाने और जुर्माने को लाखों रुपये तक करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियों की सुरक्षा के लिए डिजिटलाइजेशन, बारकोड और क्यूआर कोड के माध्यम से नए प्रावधान जोड़े जाएंगे।
SGPC का प्रकाशन संबंधी अधिकार पहले की तरह बना रहेगा। सरकार ने इस संशोधन बिल को पारित कराने के लिए 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है, जो खालसा पंथ की स्थापना के महत्वपूर्ण दिन के रूप में चुना गया है। आप सरकार का मानना है कि बेअदबी की घटनाओं पर सख्ती से निपटने के लिए यह संशोधन पर्याप्त होगा, जबकि विपक्षी दलों ने नए व्यापक कानून की मांग की है।
