पंजाब में शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव: मुख्यमंत्री भगवंत मान का दावा
पंजाब में शिक्षा में नया मोड़
पंजाब के शिक्षा क्षेत्र में हाल ही में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिले हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चार साल के कार्यकाल के दौरान यह दावा किया कि राज्य के सरकारी स्कूल अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख बन गए हैं। नेशनल सर्वे में पंजाब ने केरल को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। सरकार ने शिक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे ढांचे, शिक्षकों और छात्रों के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया गया है, और इसी कारण यह सफलता संभव हुई है।
बजट में वृद्धि और सुधारों की दिशा
राज्य सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए बजट को 12,657 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 19,279 करोड़ रुपये कर दिया है। इस वृद्धि ने स्कूलों के ढांचे और सुविधाओं में महत्वपूर्ण सुधार लाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह निवेश केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर भी ध्यान दिया गया है, जिससे सरकारी स्कूलों की छवि में सकारात्मक बदलाव आया है।
स्कूल ऑफ एमिनेंस का प्रभाव
पंजाब में 60 स्कूल ऑफ एमिनेंस की स्थापना की गई है, जहां छात्रों को उनकी रुचियों के अनुसार शिक्षा प्रदान की जा रही है। इन स्कूलों में आधुनिक प्रयोगशालाएं, बेहतर कक्षाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। सरकार का मानना है कि इससे प्रतिभाशाली छात्रों को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिला है और उनके करियर के रास्ते मजबूत हुए हैं।
परिणामों में सुधार
हाल के वर्षों में 740 छात्रों ने जेईई और 1284 ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है। ये आंकड़े सरकारी स्कूलों के बढ़ते स्तर को दर्शाते हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय सर्वे में छात्रों ने औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। पेपर लीक की कोई घटना न होना इस प्रणाली की पारदर्शिता को दर्शाता है, जिससे छात्रों और अभिभावकों का विश्वास बढ़ा है।
भविष्य की योजनाएं और आशाएं
सरकार अब शिक्षा क्रांति के दूसरे चरण की तैयारी कर रही है, जिसके लिए 3,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में पंजाब का शिक्षा मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएगा। उनका दावा है कि एक दिन विदेशी छात्र भी पंजाब में पढ़ाई के लिए आएंगे, जो राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
