हरियाणा में नशे की समस्या: पुलिसकर्मी की चेतावनी और राजनीतिक आरोप
हरियाणा में नशे का बढ़ता खतरा
चंडीगढ़: हरियाणा में नशे की समस्या गंभीर रूप ले रही है। गांवों, कस्बों और शहरों में नशा अब छिपकर नहीं, बल्कि खुलेआम बिक रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, युवा इंजेक्शन और 'चिट्टा' जैसे नशों के जाल में फंसते जा रहे हैं। इस स्थिति पर सवाल उठता है कि जिम्मेदारी किसकी है? इसी बीच, हरियाणा के एक पुलिसकर्मी सुनील संधू की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।
पुलिसकर्मी की गंभीर चेतावनी
सुनील संधू ने कहा कि वे नशे के खिलाफ कार्रवाई कर रहे थे, लेकिन उन पर दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च अधिकारी उन्हें तस्करों को छोड़ने के लिए कह रहे हैं और मना करने पर कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। यदि एक ईमानदार अधिकारी खुद को असुरक्षित महसूस करता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल उठाता है।
AAP नेता का आरोप
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने हरियाणा की बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर सीधा हमला किया है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे पंजाब में नशे के कारोबार पर नियंत्रण किया जा रहा है, तस्करों ने हरियाणा को नया ठिकाना बना लिया है।
हरियाणा सरकार पर गंभीर आरोप
अनुराग ढांडा ने कहा कि जैसे अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार ने पंजाब में नशा फैलाया, वैसे ही हरियाणा में भी नशा कारोबारियों की सरपरस्ती नायब सिंह की सरकार कर रही है। जो पुलिसकर्मी नशे को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, उन पर अत्याचार किया जा रहा है। यह एक गंभीर आरोप है कि नायब सिंह ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं करते।
पुलिस-प्रशासन को सख्त संदेश
पंजाब में 2022 के बाद से भगवंत मान सरकार ने 'नशे के खिलाफ जंग' की बात की और लगातार कार्रवाई का दावा किया। बड़े सप्लायर पकड़े गए, संपत्तियां जब्त हुईं और पुलिस-प्रशासन को सख्त संदेश दिया गया कि किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम आदमी पार्टी इसे अपनी सरकार की इच्छाशक्ति का प्रमाण मानती है।
हरियाणा में हालात पर सवाल
इसके विपरीत, हरियाणा में हालात पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि जहां बीजेपी की सरकार है, वहां नशा नेटवर्क मजबूत हो रहा है और जो अधिकारी कार्रवाई करना चाहते हैं, उन्हें संरक्षण नहीं मिल रहा। यदि सुनील संधू जैसे अधिकारियों को धमकियां मिलती हैं, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी है।
मुख्यमंत्री पर कटाक्ष
AAP नेताओं ने मुख्यमंत्री नायब सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि दूसरे राज्यों की राजनीति करने से पहले हरियाणा के युवाओं को बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी ईमानदार अधिकारी या उसके परिवार को नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे सरकार की होगी। जनता का दर्द स्पष्ट है, उन्हें राजनीति नहीं, समाधान चाहिए।
नशे के खिलाफ ठोस कार्रवाई की आवश्यकता
आज असली मुकाबला आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ ठोस कार्रवाई का है। पंजाब मॉडल को आम आदमी पार्टी अपनी ताकत बताती है, जहां कार्रवाई स्पष्ट है। हरियाणा में भी वैसी ही सख्ती और पारदर्शिता की मांग उठ रही है। नशा किसी पार्टी को नहीं पहचानता, लेकिन सरकार की नीयत और नीति फर्क पैदा करती है। अब हरियाणा सरकार पर नजरें हैं, क्या वह सख्त कदम उठाकर युवाओं का भविष्य सुरक्षित करेगी, या सवालों के घेरे में ही रहेगी?
