कोटा में नाबालिग लड़की ने बाल विवाह से बचाई अपनी जान
राजस्थान: एक साहसी कदम
राजस्थान: कोटा जिले में एक नाबालिग लड़की ने अपनी सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए अपने बाल विवाह को रोकने में सफलता पाई। लड़की ने खुद चाइल्डलाइन की हेल्पलाइन पर संपर्क किया और अपनी शादी को रोकने की अपील की। यह घटना 26 अप्रैल को हुई, जब उसकी शादी एक युवक से तय की गई थी, जो झालावाड़ जिले का निवासी है।
बच्ची की हिम्मत से टली बाल विवाह की साजिश
लड़की ने फोन पर कहा, 'अंकल, कृपया मेरी बाल विवाह रोक दीजिए।' उसने यह भी बताया कि शादी के लिए मना करने पर उसके माता-पिता उसे मारने-पीटने की धमकी दे रहे हैं। उसकी इस कॉल ने प्रशासन को तुरंत सक्रिय कर दिया। डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट (DCPU), चाइल्ड राइट्स विभाग और एक स्वयंसेवी संस्था की टीम तुरंत मौके पर पहुंची।
कोटा में बचाई गई जान
अधिकारियों ने लड़की को सुरक्षित स्थान पर ले लिया। स्थानीय पुलिस ने बाल विवाह की योजना के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसके बाद लड़की को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के समक्ष पेश किया गया। काउंसलिंग के बाद उसे अस्थायी रूप से सरकारी बालिका गृह में रखा गया है, जहां उसकी देखभाल की जा रही है।
भारत में बाल विवाह पूरी तरह से प्रतिबंधित है। 2006 में लागू 'प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट' के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़कों की शादी अवैध मानी जाती है। फिर भी, राजस्थान के कई ग्रामीण क्षेत्रों में अक्षय तृतीया जैसे त्योहारों पर बड़े पैमाने पर बाल विवाह होते हैं।
इस मामले में लड़की की बहादुरी की सराहना की जा रही है। उसने डर के बावजूद हेल्पलाइन पर फोन करके अपनी जान बचाई। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में बच्चियों को जागरूक होना बेहद आवश्यक है। चाइल्डलाइन जैसी हेल्पलाइनें 1098 नंबर पर 24 घंटे उपलब्ध हैं और बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्पर रहती हैं।
यह घटना यह दर्शाती है कि बाल विवाह अभी भी समाज में गहरी जड़ें जमाए हुए हैं, लेकिन सरकारी योजनाओं, हेल्पलाइनों और जागरूक नागरिकों की मदद से इन अनैतिक प्रथाओं को रोका जा सकता है। प्रशासन ने लड़की की सुरक्षा का आश्वासन दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
