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राजस्थान में गैस वितरण में बदलाव: OTP आधारित डिलीवरी प्रणाली लागू

राजस्थान में गैस उपभोक्ताओं के लिए 1 मई 2026 से नए नियम लागू होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों के दुरुपयोग को रोकने के लिए OTP आधारित डिलीवरी प्रणाली शुरू की है। इस बदलाव से फर्जी डिलीवरी और चोरी पर रोक लगेगी। शहरी क्षेत्रों में बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की डिलीवरी में अधिक पारदर्शिता मिलेगी। जानें इस नई व्यवस्था के सभी पहलुओं के बारे में।
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राजस्थान में गैस वितरण में बदलाव: OTP आधारित डिलीवरी प्रणाली लागू

गैस उपभोक्ताओं के लिए नए नियम


जयपुर: राजस्थान के लाखों गैस उपभोक्ताओं के लिए 1 मई 2026 से महत्वपूर्ण परिवर्तन होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों के दुरुपयोग को रोकने और वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन परिवर्तनों का सबसे अधिक प्रभाव जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर, अलवर, बीकानेर और भरतपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में देखने को मिलेगा।


OTP आधारित डिलीवरी प्रक्रिया

एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव किया गया है। अब हर गैस सिलेंडर की डिलीवरी OTP आधारित होगी। जब आपका सिलेंडर डिलीवरी के लिए निकलेगा, तो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक वन टाइम पासवर्ड (OTP) भेजा जाएगा। यह OTP डिलीवरी एजेंट को बताना आवश्यक होगा।


नई व्यवस्था के लाभ

नई व्यवस्था के अनुसार, बिना OTP बताए उपभोक्ता को सिलेंडर नहीं दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी डिलीवरी, चोरी और सब्सिडी के गलत उपयोग पर रोक लगेगी। यह सुनिश्चित करेगा कि गैस सिलेंडर सही व्यक्ति तक पहुंचे।


सिलेंडर बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है। शहरी क्षेत्रों में दो बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर रखना अनिवार्य होगा, जबकि पहले यह अवधि 21 दिन थी। इससे बार-बार बुकिंग पर नियंत्रण रहेगा और अनावश्यक सब्सिडी के उपयोग को रोका जा सकेगा।


ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नियम

ग्रामीण क्षेत्रों में बुकिंग का अंतराल और भी अधिक हो सकता है। हालांकि, इसकी अंतिम अवधि स्थानीय प्रशासन और वितरण व्यवस्था के अनुसार तय की जाएगी। इससे गांव के उपभोक्ताओं को पहले से गैस उपयोग की योजना बनानी होगी।


महिलाओं के लिए नए निर्देश

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) से जुड़ी महिलाओं के लिए नए निर्देश भी जारी किए गए हैं। योजना की लाभार्थी महिलाओं को हर वित्तीय वर्ष में कम से कम एक बार आधार आधारित ई-केवाईसी कराना अनिवार्य होगा। यदि समय पर ई-केवाईसी नहीं कराई गई, तो उनकी सब्सिडी या गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।


योजना के लाभ

सरकार का कहना है कि इससे योजना का लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंचेगा और फर्जी लाभार्थियों की पहचान करना आसान होगा। जिन शहरी क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) उपलब्ध है, वहां लोगों को PNG अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। तय समय सीमा में PNG कनेक्शन नहीं लेने पर एलपीजी सप्लाई पर असर पड़ सकता है।


इन नियमों का सबसे अधिक प्रभाव मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ेगा। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेट रखें और MyLPG ऐप के जरिए समय पर ई-केवाईसी पूरी कर लें।