ऐतिहासिक श्री दूधेश्वर नाथ मंदिर में शिवभक्तों का उमड़ा सैलाब
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भगवान दूधेश्वर के जलाभिषेक के लिए नर नारी सब रहे बेताब
भक्तों ने भगवान की कृपा के साथ मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि का आशीर्वाद भी प्राप्त किया
गाजियाबाद, 26 फ़रवरी (हि.स.)।
ऐतिहासिक श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में भगवान दूधेश्वर के दर्शन-अभिषेक के लिए बुधवार को भक्तों का जन सैलाब ही उमड़ पड़ा। भगवान दूधेश्वर के जलाभिषेक के लिए देश भर से भक्त मंदिर पहुंचे और भगवान की पूजा-अर्चना कर भगवान की कृपा के साथ मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीमहंत नारायण गिरि का आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
महाशिवरात्रि पर्व की पूजा-अर्चना व जलाभिषेक का सिलसिला रात्रि 12 बजे से शुरू हुआ, मगर मंदिर में उससे बहुत पहले ही भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग गई थीं। भगवान दूधेश्वर का प्रथम अभिषेक स्वयं महाराजश्री ने किया। उनके अभिषेक करने के बाद जैसे ही मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले गए, मंदिर परिसर ही नहीं आसपास का क्षेत्र भी भगवान शिव, हर हर महादेव व भगवान दूधेश्वर के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर में भक्तों की भीड़ को देखते हुए कई कतारे बनानी पड़ी फिर भी कतारे शंभू दयाल इंटर कॉलेज तक पहुंच गईं। भगवान के दर्शन के लिए भक्तों को घंटों इंतजार करना पड़ा मगर उनका उत्साह कम नहीं हुआ। अपनी बारी आने तक वे भगवान के नाम का जाप करते रहे व भजन गाते रहे। भगवान दूधेश्वर के जलाभिषेक के लिए सभी राजनैतिक दलों के नेता, विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मंदिर पहुंचे और सभी ने श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज का आशीर्वाद भी प्राप्त किया। श्री दूधेश्वर नाथ मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष धर्मपाल गर्ग, श्रृंगार सेवा समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल, दूधेश्वर भगवान के सेवक अजय चोपड़ा ने अतिथियों का सत्कार किया। मंदिर के पीठाधीश्वर व श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के अन्तर्राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर दूधेश्वर भगवान की पूजा.अर्चना व जलाभिषेक से हर प्रकार का कष्ट दूर होता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इसी कारण मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व पर बुधवार को भक्तों का सैलाब उमड़ा।
मंदिर के मीडिया प्रभारी एस आर सुथार ने बताया कि मंगलवार की रात्रि 9 बजे मंदिर से महाराजश्री की अध्यक्षता में भगवान शिव की बारात निकाली गई, जिसका जगह-जगह भक्तों ने स्वागत किया। शिव बारात के वापस मंदिर पहुंचने पर भगवान शिव व माता पार्वती का विवाह हुआ। मन्दिर के मुख्य द्वार पर भगवान शिव का जागरण हुआ, जिसका श्रीगणेश महाराजश्री के ज्योत प्रचंड द्वारा किया। प्रातःकाल 3.30 बजे से 4.30 तक भव्य श्रृंगार व आरती हुई। प्रथम भोग प्रसाद के रूप में 108 प्रकार के व्यंजन भगवान दूधेश्वर को अर्पित किये गए। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज के पावन सानिध्य व अध्यक्षता में भगवान दूधेश्वर के जलाभिषेक के साथ रूद्राभिषेक व अष्ट प्रहर पूजन में भी हजारों भक्तों ने भाग लिया। अष्ट प्रहर पूजन व रूद्राभिषेक श्री दूधेश्वर वेद विद्यालय के आचार्यों एवं विद्यार्थियों द्वारा कराया गया। मंदिर में भक्तों को कियी प्रकार की कोई परेशानी ना हो, इसके लिए जिला व पुलिस प्रशासन, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग आदि विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों का भी सहयोग रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / फरमान अली