अजीत पवार विमान हादसे की जांच: सीबीआई जांच की मांग, सरकार ने उठाया बड़ा कदम
मुंबई में विमान दुर्घटना की जांच को लेकर नई पहल
मुंबई: अजीत पवार के विमान हादसे की जांच को लेकर नई मांगें उठने लगी हैं। इस घटना ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई है, बल्कि आम जनता के मन में भी कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इन सवालों के उत्तर खोजने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एनसीपी ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है, जिसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि सरकार किसी भी प्रकार की शंका को दूर करना चाहती है और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी इस मामले पर चर्चा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और राज्य सरकार के पास कुछ भी छिपाने के लिए नहीं है। सीबीआई जांच से सभी आरोपों और संदेहों की निष्पक्षता से जांच संभव होगी।
जांच के सभी पहलुओं पर ध्यान
एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ संदेह व्यक्त किए थे। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी के पास ठोस जानकारी है, तो उसे सरकार या नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) के साथ साझा करना चाहिए। उन्होंने बताया कि हादसे की तकनीकी जांच चल रही है। डिजिटल रिकॉर्डर मिल चुके हैं और उनका डेटा डाउनलोड किया जा चुका है। वॉयस रिकॉर्डर की खोज भी जारी है। विशेषज्ञ विमान निर्माता कंपनियों की सहायता से डेटा की जांच की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पायलट की योग्यता, विमान के रखरखाव और सभी आवश्यक मानकों की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि केवल दुर्घटनाग्रस्त विमान ही नहीं, बल्कि संबंधित कंपनी के अन्य विमानों का भी ऑडिट किया जा रहा है। जांच 13 निर्धारित मानकों के आधार पर की जा रही है, और यदि किसी के पास अतिरिक्त जानकारी है, तो उसे भी शामिल किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री का विश्वास
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भी विश्वास व्यक्त किया कि सीबीआई जांच से सच्चाई सामने आएगी और जो भी तथ्य होंगे, वे सार्वजनिक किए जाएंगे।
जिरवाल को मिली राहत
इस बीच, मुख्यमंत्री ने एफडीए मंत्री नरहरि जिरवाल को राहत दी है। उनके कार्यालय के एक क्लर्क पर रिश्वत लेने का आरोप लगा था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच में मंत्री की कोई भूमिका नहीं पाई गई है। उन्होंने दोहराया कि सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को पूरी स्वतंत्रता दी गई है और यदि किसी के खिलाफ सबूत मिलते हैं, तो कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, मंत्री के निजी सचिव का तबादला प्रशासनिक जिम्मेदारी के तहत किया गया है।
