अमेरिका-ईरान तनाव: गालिबाफ ने ट्रंप की योजनाओं को बताया विफल
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
ट्रंप की योजनाओं में असफलता का आरोप
तेहरान में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम के समाप्त होने में केवल दो दिन बचे हैं। इस बीच, ट्रंप ने यह दावा किया है कि ईरान अमेरिका की सभी मांगों को मानने के लिए तैयार है, जिसमें परमाणु संवर्धन को रोकना भी शामिल है। हालांकि, ईरान ने इस दावे का खंडन किया है, जिससे यह संभावना बढ़ गई है कि युद्ध फिर से भड़क सकता है।
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने ट्रंप के दावे को नकारते हुए कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य योजनाएं पूरी तरह से विफल हो गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 'ईरान वेनेजुएला नहीं है', जिसका अर्थ है कि बाहरी दबाव से यहां की सरकार नहीं बदली जा सकती।
अमेरिकी प्रयासों की विफलता
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की कोशिशें नाकाम
गालिबाफ ने कहा कि दुश्मन ईरान की वायुसेना और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करने में असफल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका की कोशिशें होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हासिल करने में भी विफल रही हैं। ट्रंप पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन और उसकी सैन्य शक्ति को खत्म करने में ट्रंप पूरी तरह असफल रहे हैं।
दबाव बनाने की अमेरिकी रणनीतियाँ
बिचौलियों के माध्यम से संदेश भेजने की कोशिश
गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका ने पहले चेतावनियों और समयसीमा के माध्यम से दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन जब वह सफल नहीं हुआ, तो उसने बिचौलियों के जरिए संदेश भेजने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने युद्ध के मैदान में बढ़त बनाई है, जिसके कारण अस्थायी युद्धविराम संभव हुआ।
ईरानी संसद के अध्यक्ष ने माना कि सैन्य ताकत के मामले में अमेरिका ईरान से अधिक मजबूत है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि केवल हथियार और संसाधन ही जीत सुनिश्चित नहीं करते। ईरान ने 'असिमेट्रिक वॉरफेयर' की रणनीति अपनाकर मजबूत दुश्मन को पीछे धकेलने में सफलता पाई है।
बातचीत में मतभेद
गालिबाफ ने बातचीत के संदर्भ में कहा कि कुछ मुद्दों पर समझ बनी है, लेकिन कई महत्वपूर्ण मतभेद अभी भी मौजूद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा और कूटनीति में झुकने का सवाल नहीं उठता।
