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अल्बर्टा की स्वतंत्रता की मांग: जनमत संग्रह की तैयारी

कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में स्वतंत्रता की मांग तेजी से बढ़ रही है। अलगाववादियों ने जनमत संग्रह कराने के लिए आवश्यक समर्थन जुटा लिया है। हालांकि, चुनाव आयोग को हस्ताक्षरों की जांच करनी होगी। यदि सभी कानूनी बाधाएं दूर हो जाती हैं, तो 19 अक्टूबर को जनमत संग्रह के साथ-साथ अलगाव पर भी वोटिंग हो सकती है। जानें, अल्बर्टा के अलगाव की वजहें और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं।
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अल्बर्टा की स्वतंत्रता की मांग: जनमत संग्रह की तैयारी

कनाडा का अल्बर्टा प्रांत: स्वतंत्रता की ओर बढ़ता कदम


कनाडा का अल्बर्टा प्रांत: तेल और गैस का समृद्ध क्षेत्र
कनाडा के पश्चिमी प्रांत अल्बर्टा में स्वतंत्रता की मांग तेजी से बढ़ रही है। अलगाववादियों ने हाल ही में घोषणा की है कि उन्होंने स्वतंत्रता के लिए जनमत संग्रह कराने के लिए आवश्यक समर्थन जुटा लिया है। उनके अनुसार, उन्होंने लगभग 3 लाख हस्ताक्षर एकत्र किए हैं, जबकि इसके लिए 1.78 लाख की आवश्यकता थी।


आंदोलन के नेता मिच सिलवेस्ट्रे ने इसे एक ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि यह लड़ाई अब नए चरण में प्रवेश कर गई है। अल्बर्टा, जहां लगभग 50 लाख लोग निवास करते हैं, लंबे समय से खुद को कनाडा के अन्य हिस्सों से अलग मानता है। यहां के लोग अपनी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और राजनीति को अलग मानते हैं, लेकिन निर्णय ओटावा में लिए जाते हैं।


चुनाव आयोग की भूमिका

हालांकि, इतना समर्थन जुटाने का मतलब यह नहीं है कि जनमत संग्रह निश्चित है। चुनाव आयोग को पहले इन हस्ताक्षरों की जांच करनी होगी। इस प्रक्रिया में वर्तमान में अदालत के आदेश के कारण रोक लगी हुई है। यदि वोटिंग अल्बर्टा के पक्ष में होती है, तो यह प्रांत कनाडा को छोड़कर एक स्वतंत्र देश बन सकता है।


जनमत संग्रह की संभावनाएं

अल जजीरा के अनुसार, यदि सभी कानूनी बाधाएं समाप्त हो जाती हैं, तो 19 अक्टूबर को प्रस्तावित जनमत संग्रह के साथ-साथ अलगाव पर भी वोटिंग कराई जा सकती है। उसी दिन संविधान और इमिग्रेशन जैसे अन्य मुद्दों पर भी मतदान की योजना है।


समर्थन की स्थिति

यदि यह प्रस्ताव वोटिंग तक पहुंचता है, तो लोगों से सीधा सवाल पूछा जाएगा कि क्या अल्बर्टा कनाडा से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बनना चाहिए। लेकिन सर्वेक्षण बताते हैं कि वर्तमान में केवल लगभग 30 प्रतिशत लोग इसके समर्थन में हैं, जिससे जनमत संग्रह पास होना आसान नहीं होगा।


हालांकि, अलगाववादियों का मानना है कि यह आंकड़ा वोटिंग के दौरान बढ़ सकता है। अल्बर्टा की प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने कहा है कि यदि आवश्यक हस्ताक्षर पूरे होते हैं, तो वह वोटिंग को आगे बढ़ाएंगी, लेकिन वह खुद कनाडा से अलग होने के पक्ष में नहीं हैं।


अल्बर्टा की अलगाव की वजहें


  • अल्बर्टा एक तेल और गैस से भरपूर राज्य है, जहां कनाडा के कुल तेल उत्पादन का लगभग 84% हिस्सा निकलता है। यहां के लोग मानते हैं कि वे अधिक कमाते हैं, लेकिन लाभ अन्य हिस्सों को अधिक मिलता है। उन्हें यह शिकायत है कि टैक्स का पैसा ओटावा में खर्च होता है, जबकि उनकी आवाज कम सुनी जाती है।

  • केंद्र सरकार के साथ टकराव भी एक बड़ा मुद्दा है। ओटावा में लिए गए निर्णयों को लेकर अल्बर्टा में नाराजगी रहती है, खासकर पर्यावरण और जलवायु से जुड़े नियमों को लेकर।

  • अल्बर्टा की पहचान और राजनीति भी एक कारण है। यहां की राजनीति अधिक कंजर्वेटिव है, जबकि केंद्र में लिबरल विचारधारा हावी रही है।

  • इसके अलावा, स्थानीय लोगों में यह भावना है कि केंद्र सरकार उनके संसाधनों पर अधिक नियंत्रण रखती है, जिससे गुस्सा बढ़ता है।