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उत्तर प्रदेश में विशेष मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी: 12.55 करोड़ मतदाता शामिल

उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई है, जिसमें 12.55 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इस प्रक्रिया में 2.89 करोड़ नाम हटाए गए हैं, जिनमें मृतक, स्थानांतरित और डुप्लीकेट नाम शामिल हैं। नागरिकों को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया है, जो 6 फरवरी तक चलेगा। जानें किन जिलों में सबसे ज्यादा नाम कटे और प्रशासन की प्रक्रिया के बारे में।
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उत्तर प्रदेश में विशेष मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी: 12.55 करोड़ मतदाता शामिल

लखनऊ में ड्राफ्ट मतदाता सूची का अनावरण


लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अंतर्गत तैयार की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची मंगलवार को सार्वजनिक की गई। इस संबंध में जानकारी देते हुए प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया कि इस नई सूची में कुल 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल हैं। पहले राज्य में 15.44 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे, लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के चलते 2.89 करोड़ नाम सूची से हटा दिए गए हैं।


क्यों हटाए गए इतने नाम?

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि जिन 2.89 करोड़ नामों को हटाया गया है, उनमें विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं। इनमें से 46.23 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनका निधन हो चुका है। इसके अलावा, 2.17 करोड़ मतदाता ऐसे हैं जो राज्य या जिले से स्थानांतरित हो चुके हैं। 25.47 लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए, यानी एक ही व्यक्ति के नाम एक से अधिक बार दर्ज थे। कुल मिलाकर लगभग 18 प्रतिशत मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए हैं।


दावे और आपत्तियों का अवसर

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी जिलों में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया है। अब आम नागरिकों और राजनीतिक दलों को इस पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका मिलेगा। यह प्रक्रिया मंगलवार से शुरू होकर 6 फरवरी तक चलेगी। इसके बाद 27 फरवरी तक सभी दावे और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अंतिम और संशोधित मतदाता सूची का प्रकाशन 6 मार्च को किया जाएगा।


कौन से जिलों में सबसे ज्यादा नाम कटे?

ड्राफ्ट सूची के अनुसार, सबसे अधिक मतदाताओं के नाम राजधानी लखनऊ में कटे हैं, जहां लगभग 12 लाख नाम हटाए गए हैं। प्रयागराज में 11.56 लाख, कानपुर नगर में 9 लाख, आगरा में 8.36 लाख, गाजियाबाद में 8.18 लाख और बरेली में 7.14 लाख नाम सूची से बाहर हुए हैं। इसके अलावा, मेरठ में 6.65 लाख, गोरखपुर में 6.45 लाख, सीतापुर में 6.23 लाख और जौनपुर में 5.89 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं।


प्रशासन का दावा: प्रक्रिया रही पारदर्शी

यह ध्यान देने योग्य है कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया कुछ समय से चल रही थी। चुनाव आयोग ने इस दौरान दो बार समयसीमा बढ़ाई, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। प्रशासन का कहना है कि इस अतिरिक्त समय का उपयोग जिला स्तर पर सत्यापन को और मजबूत करने के लिए किया गया। अब यह देखना होगा कि दावे और आपत्तियों के बाद अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम फिर से जुड़ते हैं और इसका चुनावी राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।