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उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड: क्या है वीवीआईपी कनेक्शन?

उत्तराखंड में अंकिता भंडारी के हत्याकांड ने एक बार फिर से राजनीतिक और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है। नए आरोपों और वीवीआईपी कनेक्शन के चलते जनता और विपक्षी दलों ने सीबीआई जांच की मांग तेज कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में किसी भी जांच से पीछे न हटने का आश्वासन दिया है। 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान किया गया है, जिसमें कई सामाजिक संगठनों का समर्थन है। जानिए इस मामले में क्या नया मोड़ आया है और कैसे यह राज्य की राजनीति को प्रभावित कर रहा है।
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उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड: क्या है वीवीआईपी कनेक्शन?

राज्य में फिर से गरमाया माहौल


देहरादून: उत्तराखंड में अंकिता भंडारी के हत्या मामले ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है। इस तीन साल पुराने केस में नए आरोपों और दावों के चलते जनता और राजनीतिक हलकों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों ने सीबीआई जांच की मांग को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की जांच से पीछे नहीं हटेगी।


उत्तराखंड बंद का ऐलान

विरोध प्रदर्शनों की बढ़ती संख्या के बीच 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान किया गया है। कई सामाजिक और मजदूर संगठनों ने इस बंद का समर्थन किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक इस हत्याकांड में शामिल कथित वीवीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


वीवीआईपी कनेक्शन ने बढ़ाई हलचल

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब उर्मिला सनावर नाम की महिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो और ऑडियो साझा किया। उन्होंने खुद को भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताते हुए कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में जिस वीवीआईपी का जिक्र होता रहा है, वह भाजपा से जुड़ा एक बड़ा नेता है। उनके अनुसार, उनके पास मौजूद ऑडियो में इस पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। इन दावों के बाद राज्य में फिर से सवाल उठने लगे हैं कि क्या मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष थी।


विपक्ष का सड़कों पर उतरना

4 जनवरी को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास के बाहर एक बड़ा प्रदर्शन हुआ, जिसमें कांग्रेस, सीपीआईएम, सीपीआई, उत्तराखंड क्रांति दल समेत कई संगठन शामिल हुए। हजारों लोगों ने दोषियों की गिरफ्तारी और सीबीआई जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह मामला केवल न्याय का नहीं, बल्कि राज्य की प्रतिष्ठा का भी बन चुका है।


भाजपा में भी असंतोष

इस मामले में भाजपा के भीतर भी असंतोष की आवाजें उठने लगी हैं। पार्टी की चुप्पी से नाराज होकर भाजपा युवा मोर्चा के ऋषिकेश जिला मंत्री ने इस्तीफा दे दिया। यमकेश्वर की पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल और वरिष्ठ नेता वीरेंद्र सिंह बिष्ट ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर निष्पक्ष सीबीआई जांच की मांग की। विकास नगर क्षेत्र से भाजपा नेता अरविंद तोमर ने भी पार्टी से इस्तीफा देकर अपनी नाराजगी जताई।


अंकिता के पिता की भावुक अपील

अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि उन्हें केवल अपनी बेटी के लिए न्याय चाहिए। उन्होंने मांग की कि उर्मिला सनावर के पास मौजूद सभी सबूत अदालत में पेश किए जाएं। साथ ही उन्होंने घटना से जुड़े आरोपियों की कॉल डिटेल्स की गहन जांच की भी मांग की। उन्होंने जनता से 11 जनवरी के उत्तराखंड बंद में सहयोग करने की अपील की, यह कहते हुए कि लोगों का समर्थन उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता है।


मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार किसी भी तरह की जांच से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस संवेदनशील मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। यदि किसी के पास ठोस सबूत हैं तो सरकार उन्हें गंभीरता से देखेगी। मुख्यमंत्री ने जल्द ही अंकिता के माता-पिता से मुलाकात करने की भी बात कही है।


अंकिता भंडारी हत्याकांड का सारांश

अंकिता भंडारी ऋषिकेश के एक रिजॉर्ट में काम करती थी। आरोप है कि रिजॉर्ट के मालिक और उसके सहयोगियों ने उस पर अनैतिक दबाव बनाया, जिसका उसने विरोध किया। इसी के बाद उसकी हत्या कर दी गई। लंबे समय तक चले मुकदमे में मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। फिर भी, वीवीआईपी कनेक्शन और नए आरोपों के चलते यह मामला एक बार फिर राज्य की राजनीति और समाज के केंद्र में आ गया है।