उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति का आगाज़
हरिद्वार में नई ईवी नीति की तैयारी
हरिद्वार: उत्तराखंड सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई ईवी नीति लाने की योजना बना रही है। राज्य सरकार का मानना है कि ऊर्जा संकट और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाना आवश्यक है। इस नीति के माध्यम से आम जनता और उद्योगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट में पेश होगी नई नीति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को अपने कैंप कार्यालय में इस नीति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई ईवी नीति को जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा ताकि इसे जल्दी से मंजूरी मिल सके। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव और वैश्विक तेल संकट को देखते हुए ऊर्जा संसाधनों के वैकल्पिक विकल्पों की तलाश करना आवश्यक है।
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को मिलेगी छूट
मुख्यमंत्री ने बताया कि जो लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे, उन्हें विशेष छूट दी जाएगी। इसके अलावा, ईवी निर्माण करने वाली कंपनियों और निवेशकों को भी इस नीति में शामिल किया जाएगा, जिससे नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकें। सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देना है।
वर्तमान में, राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों पर रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स में छूट दी जा रही है, लेकिन नई नीति के तहत खरीदारों को और अधिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, पूरे राज्य में ईवी चार्जिंग स्टेशनों का एक विस्तृत नेटवर्क स्थापित करने की योजना भी बनाई जा रही है।
तेल आयात में कमी की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पास प्राकृतिक संसाधनों की मात्रा सीमित है, और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए हमें वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उनका मानना है कि ईवी वाहनों के बढ़ते उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण में कमी आएगी और आम लोगों पर ईंधन के खर्च का बोझ भी कम होगा। इसके अलावा, इससे देश में तेल के आयात में भी कमी आने की संभावना है। सरकार ने ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए हर शनिवार को नो व्हीकल डे मनाने का निर्णय लिया है, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।
