केरल विधानसभा चुनाव 2026: मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कौन है आगे?
मुख्यमंत्री पद की जंग
तिरुवनंतपुरम: केरल में 2026 के विधानसभा चुनाव में यूडीएफ, यानी कांग्रेस गठबंधन ने शानदार जीत हासिल की है, जिससे राज्य में सरकार बनाना लगभग तय हो गया है। लेकिन इस जीत के साथ ही पार्टी के भीतर एक नई हलचल शुरू हो गई है। जश्न मनाने से पहले ही सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी किसे मिलेगी? इस मुद्दे ने पार्टी में खींचतान को जन्म दे दिया है, जो अब खुलकर सामने आ रही है।
जहां एक ओर समर्थक जीत का जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के बड़े नेताओं के बीच नेतृत्व को लेकर हलचल तेज हो गई है। पोस्टरबाजी से लेकर दिल्ली में बैठकों तक, हर जगह इसी मुद्दे पर चर्चा हो रही है। फिलहाल, तीन प्रमुख नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं।
केसी वेणुगोपाल: संगठन में मजबूत पकड़
मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे मजबूत दावेदारों में केसी वेणुगोपाल का नाम सबसे ऊपर है। पार्टी संगठन में उनकी गहरी पकड़ है और वे लंबे समय से केंद्रीय नेतृत्व के करीब रहे हैं। यही कारण है कि उन्हें हाईकमान का समर्थन मिलने की संभावना अधिक मानी जा रही है।
वेणुगोपाल लगातार विधायकों से मुलाकात कर रहे हैं और समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। खबर है कि वे दिल्ली जाकर पार्टी नेतृत्व से भी चर्चा कर चुके हैं। उनकी रणनीति स्पष्ट है: अधिक से अधिक समर्थन हासिल कर खुद को सबसे मजबूत विकल्प के रूप में पेश करना।
वीडी सतीशन: जमीनी स्तर पर मजबूत नेता
दूसरे प्रमुख दावेदार वीडी सतीशन हैं, जिनका नाम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। चुनाव के दौरान उन्होंने आक्रामक अंदाज में एलडीएफ सरकार को घेरा और पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दी। उनकी सक्रियता का असर चुनावी नतीजों में भी देखने को मिला।
सतीशन को खास तौर पर जमीनी कार्यकर्ताओं का मजबूत समर्थन प्राप्त है। पार्टी के अंदर उनके समर्थकों का मानना है कि उनकी मेहनत और नेतृत्व क्षमता ने यूडीएफ को इस जीत तक पहुंचाया। अब वे भी दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने अपना दावा रखने की तैयारी में हैं।
रमेश चेन्निथला: अनुभव का भरोसा
तीसरे दावेदार के रूप में रमेश चेन्निथला का नाम सामने आ रहा है। वे तीनों में सबसे अनुभवी नेता माने जाते हैं और लंबे समय से पार्टी में सक्रिय हैं। उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी है, जो उन्हें इस दौड़ में एक अलग पहचान देता है। चेन्निथला के समर्थकों का कहना है कि मौजूदा समय में पार्टी को एक संतुलित और शांत नेतृत्व की जरूरत है, जो सरकार को स्थिरता दे सके। उनका मानना है कि इस भूमिका के लिए चेन्निथला सबसे उपयुक्त हैं।
अंतिम फैसला हाईकमान के हाथ
इन तीनों नेताओं के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने पार्टी के भीतर हलचल को और तेज कर दिया है। अलग-अलग गुट अपने-अपने नेता के समर्थन में सक्रिय हो गए हैं। इससे स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री पद का फैसला आसान नहीं होने वाला। हालांकि, अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान के हाथ में है। दिल्ली में होने वाली बैठकों के बाद ही यह तय होगा कि केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा। तब तक पार्टी के अंदर यह सियासी हलचल जारी रहने की संभावना है।
