चंडीगढ़ में जल, सीवर और कूड़ा शुल्क में वृद्धि, आम जनता पर पड़ेगा असर
चंडीगढ़ में नई वित्तीय चुनौतियाँ
चंडीगढ़. ट्राईसिटी के केंद्र और हरियाणा-पंजाब की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में निवासियों के लिए नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत महंगी साबित होने वाली है। चंडीगढ़ नगर प्रशासन ने शहर की स्वच्छता और जल आपूर्ति सेवाओं को बनाए रखने के लिए पानी, सीवर और कूड़ा संग्रह शुल्क में वृद्धि की आधिकारिक घोषणा की है। ये नई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी और इसका सीधा प्रभाव घरेलू उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा। प्रशासन का कहना है कि यह बढ़ोतरी वार्षिक संशोधन का हिस्सा है, लेकिन आम जनता के लिए यह महंगाई की एक नई लहर के समान है।
पानी और सीवरेज शुल्क में 5% की वृद्धि
पानी और सीवरेज बिल में 5 फीसदी का इजाफा
जल आपूर्ति विभाग ने पानी के स्लैब में लगभग 5% की वृद्धि की है। इसका अर्थ है कि उपभोक्ताओं को अधिक पानी खर्च करने पर अधिक बिल का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, कम खपत करने वाले परिवारों को थोड़ी राहत देने का प्रयास किया गया है, लेकिन सीवरेज सेस में वृद्धि के कारण कुल बिल की राशि बढ़ जाएगी। इस वार्षिक संशोधन ने उन लोगों की चिंता बढ़ा दी है जो पहले से ही बढ़ती कीमतों से परेशान हैं।
कूड़ा उठाने और कम्युनिटी सेंटर की बुकिंग महंगी
कूड़ा उठाना और कम्युनिटी सेंटर की बुकिंग भी हुई महंगी
शहर की सफाई व्यवस्था के लिए अब अधिक शुल्क चुकाना होगा। डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण शुल्क में 5% की वृद्धि की गई है, जो मकान के आकार के अनुसार वसूली जाएगी। बड़े मकान मालिकों को इस मद में अधिक भुगतान करना होगा। इसके अलावा, सामाजिक कार्यक्रमों के लिए उपयोग होने वाले कम्युनिटी सेंटर्स की बुकिंग भी 5 से 10% तक महंगी कर दी गई है। अब शहरवासियों को शादी-ब्याह या अन्य समारोहों के लिए पहले से अधिक बजट तैयार रखना होगा।
व्यापारियों पर भी बढ़ा बोझ
व्यापारियों पर भी गिरा गाज, दुकानों का किराया बढ़ा
प्रशासन ने केवल रिहायशी इलाकों को ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक संपत्तियों को भी इस दायरे में लिया है। नगर निगम के अधीन आने वाली दुकानों, बूथों और अन्य संपत्तियों के किराए में भी बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से चंडीगढ़ के स्थानीय व्यापारियों की लागत बढ़ेगी, जिसका प्रभाव अंततः ग्राहकों पर पड़ेगा। प्रशासन के इस कदम को राजस्व बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन मध्यम वर्ग के लिए यह एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित होगा।
