तमिलनाडु चुनाव: कांग्रेस की सीटों पर जोर और सरकार में हिस्सेदारी की मांग
राजनीति में हलचल
चेन्नई: तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। कांग्रेस पार्टी अब डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है। पार्टी के भीतर सत्ता-साझाकरण को लेकर चर्चाएँ केवल सीटों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि सरकार में भागीदारी की मांग भी उठने लगी है।
कांग्रेस का सीटों पर ध्यान
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने 40 सीटों को अपने लिए आदर्श लक्ष्य निर्धारित किया है। पार्टी का मानना है कि इन सीटों को जीतकर वह अगली विधानसभा में अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता को साबित कर सकेगी। हालांकि, डीएमके फिलहाल कांग्रेस को 32 सीटें देने के लिए सहमत है।
इस बीच, कांग्रेस ने बातचीत में लचीलापन दिखाते हुए अपनी मांग को 38 सीटों तक सीमित कर दिया है। यह दर्शाता है कि पार्टी बातचीत को पटरी से उतरने नहीं देना चाहती, लेकिन बेहतर सौदे की कोशिश भी जारी रखे हुए है।
सरकार में हिस्सेदारी की मांग
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने हाल ही में स्पष्ट किया कि पार्टी केवल सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती। उनका कहना है कि यदि गठबंधन सत्ता में आता है, तो कांग्रेस सरकार में भागीदारी की अपेक्षा रखती है। यह बयान पार्टी कार्यकर्ताओं के बढ़ते दबाव और चुनाव से पहले संगठनात्मक मजबूती की आवश्यकता को दर्शाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह खुद को केवल 'जूनियर पार्टनर' की भूमिका से बाहर निकालना चाहती है।
टीवीके का प्रभाव
कांग्रेस की यह सक्रियता तब और बढ़ गई जब अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने कांग्रेस को 'स्वाभाविक सहयोगी' बताया। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गईं।
टीवीके के प्रवक्ता फेलिक्स गेराल्ड ने कहा कि विजय और राहुल गांधी के बीच अच्छे संबंध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और टीवीके के बीच गठबंधन की संभावना मजबूत है, लेकिन तमिलनाडु कांग्रेस के भीतर आंतरिक हित और गुटबाजी बातचीत की गति को धीमा कर सकती है।
निर्णायक भूमिका विजय की
टीवीके नेताओं ने स्पष्ट किया है कि गठबंधन से जुड़े किसी भी बड़े निर्णय से पहले पार्टी प्रमुख विजय से परामर्श किया जाएगा। टीवीके नेता निर्मल कुमार ने कहा कि सभी राजनीतिक विकल्पों पर चर्चा पार्टी नेतृत्व के स्तर पर होगी और उसके बाद ही औपचारिक घोषणा की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में लगभग दो महीने का समय बाकी है, इसलिए अंतिम निर्णय के लिए जल्दबाजी नहीं की जाएगी।
बदलते समीकरण
तमिलनाडु में चुनाव से पहले कांग्रेस, डीएमके और संभावित रूप से टीवीके के बीच चल रही बातचीत यह दर्शाती है कि राज्य की राजनीति एक नए मोड़ की ओर बढ़ रही है। कांग्रेस अधिक राजनीतिक स्पेस चाहती है, जबकि डीएमके अपने गठबंधन संतुलन को बनाए रखने में जुटी है। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि सत्ता-साझाकरण की यह खींचतान किस दिशा में जाती है।
