तमिलनाडु में राजनीतिक बदलाव: कांग्रेस की ऐतिहासिक वापसी और नए मंत्रियों की नियुक्ति
तमिलनाडु में कैबिनेट विस्तार
तमिलनाडु: हाल ही में तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। 'तमिलागा वेट्रिक्कड़गम' (टीवीके) की पहली कैबिनेट का विस्तार किया गया, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने की। इस विस्तार की औपचारिक शुरुआत राज्यपाल राजेंद्रकुमार विशालनाथ अर्लकर ने चेन्नई के लोक भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में की।
टीवीके के विधायकों को मिली जगह
इस नए फेरबदल में 23 मंत्रियों को पद से मुक्त किया गया, जिसमें टीवीके के 21 विधायकों को शामिल किया गया। इसके अलावा, कांग्रेस के 2 विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। यह विस्तार कांग्रेस पार्टी की लगभग 59 साल बाद राज्य की सत्ता में वापसी का प्रतीक है।
कैबिनेट में नहीं मिली जगह
राज्यपाल अर्लकर ने सभी सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन इस बार भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग और विप्लव चिरुथाई काची को कैबिनेट में स्थान नहीं मिला।
अगली कैबिनेट विस्तार में शामिल होने की संभावना
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों दलों को अगली कैबिनेट विस्तार में शामिल किया जाएगा, क्योंकि मंत्रियों के नाम पर सहमति नहीं बन पाई। मुख्यमंत्री विजय ने इन दलों को कैबिनेट गठन के लिए आमंत्रित किया है।
अभी भी 3 पद खाली
लोक निर्माण और खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन ने बताया कि मुख्यमंत्री विजय का सपना है कि सभी सहयोगी दल सरकार का हिस्सा बनें। उन्होंने विशेष रूप से विप्लव चिरुथाई काची के प्रमुख थोल तिरुमावलवन को कैबिनेट में शामिल होने की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री विजय ने 10 मई को 9 मंत्रियों के साथ सरकार की कमान संभाली थी।
कांग्रेस की सत्ता में वापसी
इस घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात कांग्रेस की सत्ता में वापसी है। कांग्रेस विधायक राजेश कुमार और तिरु पी. विश्वनाथन ने मंत्री पद की शपथ ली। 1967 में कांग्रेस के एम. भक्तवत्सलम अंतिम बार राज्य के मुख्यमंत्री थे। उसके बाद से कांग्रेस राज्य में किसी भी गठबंधन सरकार का हिस्सा नहीं बन पाई थी। अब टीवीके के साथ मिलकर कांग्रेस ने लगभग छह दशक बाद तमिलनाडु की राजनीति में कदम रखा है।
