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तृणमूल कांग्रेस में असंतोष: शांतनु सेन ने इस्तीफा देकर मचाई हलचल

तृणमूल कांग्रेस में हालिया चुनावी हार के बाद, वरिष्ठ नेता शांतनु सेन ने राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देकर पार्टी में असंतोष की लहर को उजागर किया है। उन्होंने जनता के फैसले का सम्मान करते हुए यह कदम उठाया। सेन ने पार्टी नेतृत्व पर भ्रष्टाचार और आरजी कर बलात्कार मामले को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। उनके इस्तीफे के बाद कई अन्य नेताओं ने भी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और पार्टी की वर्तमान स्थिति के बारे में।
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तृणमूल कांग्रेस में असंतोष: शांतनु सेन ने इस्तीफा देकर मचाई हलचल

कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस का संकट


कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस की हालिया चुनावी हार के बाद पार्टी में असंतोष की लहर तेज हो गई है। पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता शांतनु सेन ने गुरुवार को राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर भ्रष्टाचार और आरजी कर बलात्कार व हत्या मामले को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा।


इस्तीफे की वजह

शांतनु सेन ने ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि जनता के फैसले और पार्टी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रवक्ता के रूप में पार्टी का बचाव करना अब उनके लिए नैतिक रूप से संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है।


ममता बनर्जी को भेजा इस्तीफा


सेन ने अपने इस्तीफे में लिखा कि वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में जनता द्वारा दिए गए जनादेश का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'जनता के फैसले को स्वीकार करते हुए, मैंने राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।'


नैतिकता का सवाल

अब बचाव करना नैतिक रूप से ठीक नहीं


सेन ने अपने पत्र में कहा कि कई बार उन्होंने व्यक्तिगत असहमति के बावजूद पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने लिखा, 'कई मुश्किल परिस्थितियों में जब मेरी अंतरात्मा भी सहमत नहीं थी, तब भी मैंने पार्टी का पक्ष रखा और इसके लिए मुझे आलोचना का सामना करना पड़ा।'


उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन अब जब आरजी कर घटना, नौकरी घोटाले और भ्रष्टाचार के कारण लोगों ने हमें नकार दिया है, तो मेरी अंतरात्मा मुझे प्रवक्ता के रूप में इन बातों का समर्थन करने की अनुमति नहीं देती।'


आरजी कर कांड पर विवाद

आरजी कर कांड को लेकर बढ़े मतभेद


पिछले साल कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा किया था। इस घटना के बाद संस्थान में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे।


शांतनु सेन उन तृणमूल नेताओं में शामिल थे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से संस्थान में अनियमितताओं पर सवाल उठाए थे।


पार्टी की प्रतिक्रिया

पार्टी ने किया था निलंबित


आरजी कर मामले में दिए गए बयानों के बाद तृणमूल नेतृत्व असहज हो गया था। पार्टी ने उन्हें 'पार्टी विरोधी गतिविधियों' का आरोप लगाते हुए निलंबित कर दिया था, लेकिन बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया।


जांच में सहयोग

जांच में सहयोग देने की बात


बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद, सेन ने सोशल मीडिया पर भाजपा की नई सरकार को बधाई दी थी, जिससे तृणमूल खेमे में असहजता बढ़ गई थी। उन्होंने कहा कि वह आरजी कर बलात्कार-हत्या मामले से जुड़ी किसी भी जांच में नई सरकार को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं।


अन्य नेताओं की नाराजगी

कई नेताओं ने जताई नाराजगी


हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जाहिर की है। पार्टी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कोलकाता नगर निगम की लोक लेखा समिति से इस्तीफा देने के बाद प्रवक्ता पद भी छोड़ दिया।


पार्षद सुशांत घोष ने नगर अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया, जबकि लोकसभा सदस्य काकोली घोष दस्तीदार ने भी हाल ही में संगठन के सभी पदों से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व के कामकाज पर सवाल उठाए थे।