तेलंगाना सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों को दी सख्त चेतावनी

सरकारी अस्पतालों में बढ़ते मरीजों की संख्या
तेलंगाना में कई प्राइवेट अस्पतालों द्वारा गंभीर मरीजों को तब छुट्टी देने की घटनाएं बढ़ रही हैं, जब उनकी स्थिति बिगड़ जाती है या इलाज का खर्चा खत्म हो जाता है। ऐसे मरीज जब सरकारी अस्पतालों में पहुंचते हैं, तो उनकी जान बचाना कठिन हो जाता है। इस स्थिति को देखते हुए, तेलंगाना सरकार ने अस्पतालों को सख्त चेतावनी दी है।स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजा नरसिम्हा ने हाल ही में एक बैठक में बताया कि हैदराबाद के निज़ाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (NIMS) में हर दिन 80 से 100 मरीज आते हैं, जिनमें से आधे से अधिक की हालत गंभीर होती है। यह मरीज अक्सर प्राइवेट अस्पतालों द्वारा आधे इलाज के बाद डिस्चार्ज किए जाते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी मरीज को इमरजेंसी में भर्ती करने से मना नहीं किया जाएगा। मरीजों की स्थिति को पहले स्थिर किया जाएगा, फिर उन्हें संबंधित वार्ड में भेजा जाएगा। अगर किसी सरकारी अस्पताल में बेड नहीं है, तो प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को दूसरे सरकारी अस्पताल में भेजा जाएगा।
सरकार का उद्देश्य है कि हर नागरिक को उचित और पूर्ण इलाज मिले, चाहे वह सरकारी अस्पताल में हो या प्राइवेट। यह चेतावनी उन अस्पतालों के लिए एक सबक है जो इलाज को सेवा नहीं, बल्कि केवल मुनाफा कमाने का साधन समझते हैं।