Newzfatafatlogo

दिल्ली में वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: चार हफ्ते में एक्शन प्लान पेश करें

दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते वायु प्रदूषण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को चार हफ्ते में ठोस एक्शन प्लान पेश करने का आदेश दिया है। CAQM द्वारा सुझाए गए उपायों को तुरंत लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसके तहत पुरानी गाड़ियों पर सख्त कार्रवाई और प्रदूषण नियंत्रण के लिए अन्य महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। जानें इस फैसले का क्या असर होगा।
 | 
दिल्ली में वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश: चार हफ्ते में एक्शन प्लान पेश करें

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय


नई दिल्ली: दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में बढ़ते वायु प्रदूषण के मद्देनजर, सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 21 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई में, अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और एनसीआर के अन्य राज्यों को चार सप्ताह के भीतर ठोस कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।


CAQM के सुझावों का कार्यान्वयन

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच ने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा सुझाए गए 15 दीर्घकालिक उपायों को तुरंत लागू किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन उपायों पर कोई आपत्ति नहीं सुनी जाएगी।


CAQM के मुख्य उपाय क्या हैं?


CAQM ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनमें सबसे प्रमुख कदम प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से दिल्ली-एनसीआर से हटाना है, क्योंकि वाहनों से होने वाला उत्सर्जन इस क्षेत्र में प्रदूषण का मुख्य कारण है।


इसके अतिरिक्त, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) प्रणाली को मजबूत करना, रेल और मेट्रो नेटवर्क का विस्तार करना, रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) को बढ़ावा देना और इलेक्ट्रिक वाहन नीति में बदलाव शामिल हैं। पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने वालों को अधिक प्रोत्साहन देने का भी प्रस्ताव है।


पुरानी गाड़ियों पर सख्त कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में संशोधन किया है। अब बीएस-IV मानकों को पूरा न करने वाली पुरानी गाड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। पहले अगस्त 2025 के आदेश में कुछ राहत दी गई थी, लेकिन अब अदालत ने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए ऐसे वाहनों पर शिकंजा कसना आवश्यक है।


अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि CAQM ने विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है और एजेंसियां इन उपायों को लागू करने के लिए तैयार हैं।


सख्त समय सीमा की आवश्यकता

एमिकस क्यूरी ने डेडलाइन की करी मांग


सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कहा कि पहले भी ऐसे सुझाव आए थे, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ। इसलिए अदालत को इन उपायों के लिए सख्त समय सीमा निर्धारित करनी चाहिए। कोर्ट ने इस पर सहमति जताई और चार हफ्ते का समय दिया। सभी संबंधित एजेंसियों को एक्शन प्लान के साथ समयसीमा बतानी होगी कि कब तक क्या लागू होगा।


प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम

प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी कदम


दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) अक्सर खराब हो जाता है। वाहन, उद्योग, धूल और अन्य स्रोतों से प्रदूषण बढ़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब दीर्घकालिक समाधान पर ध्यान केंद्रित करना होगा। पर्यावरण मुआवजा शुल्क के फंड का उपयोग भी इन उपायों में किया जा सकता है। यह निर्णय लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती बढ़ेगी।