नासिक में टीसीएस मामले में निदा खान को मिली अदालत से राहत की उम्मीदें खत्म
निदा खान की अंतरिम सुरक्षा याचिका खारिज
नासिक में चर्चित टीसीएस मामले की आरोपी निदा खान को अदालत से फिलहाल राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी अंतरिम सुरक्षा की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस समय उन्हें अस्थायी संरक्षण नहीं दिया जा सकता। खान द्वारा दायर की गई अग्रिम जमानत याचिका अभी लंबित है, और उनकी कानूनी टीम ने अंतिम निर्णय आने तक अंतरिम राहत की मांग की थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
अतिरिक्त समय की मांग पर अदालत का निर्णय
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत से लिखित जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए 27 अप्रैल तक का समय निर्धारित किया है। इस मामले में अगली सुनवाई इसी तारीख को होने की संभावना है, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
गर्भावस्था का मुद्दा और अभियोजन पक्ष का विरोध
अदालत में हुई बहस के दौरान खान के वकील ने उनकी गर्भावस्था का मुद्दा उठाया, जिसे अंतरिम राहत के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बताया। उनका तर्क था कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इस दलील का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी भी प्रकार की राहत देना उचित नहीं होगा।
साक्ष्यों पर बचाव पक्ष का तर्क
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुछ तस्वीरें पेश कीं, जिन्हें बीपीओ पिकनिक और ट्रिप से संबंधित बताया गया। इन तस्वीरों के माध्यम से उन्होंने आरोपों की जांच में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को उजागर करने का प्रयास किया। वहीं, बचाव पक्ष ने तर्क किया कि इन साक्ष्यों से आरोपों की पुष्टि नहीं होती और अब तक कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
एससी-एसटी अधिनियम का विवाद
इस मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) अधिनियम का लागू होना भी एक बड़ा विवाद का विषय बना हुआ है। बचाव पक्ष का कहना है कि इस कानून के तहत लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। खान की ओर से पेश अधिवक्ता राहुल कसलीवाल ने कहा कि अग्रिम जमानत की सुनवाई में समय लग सकता है, इसलिए उन्होंने पहले अंतरिम सुरक्षा की मांग की थी।
पुलिस का दावा
पुलिस का कहना है कि निदा खान की इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत मिलना आसान नहीं होगा। पुलिस ने यह भी कहा कि मामले में और भी पीड़ित हो सकते हैं, लेकिन कई लोग डर या सामाजिक दबाव के कारण सामने नहीं आ रहे हैं।
