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नोएडा में छात्र की डूबने से मौत: प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

नोएडा के सेक्टर-126 में एक छात्र की डूबने से हुई मौत ने प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है। चार छात्रों का एक समूह पिकनिक मनाने गया था, जहां एक छात्र गहरे पानी में डूब गया। घटना के बाद प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। जानें इस दर्दनाक घटना के पीछे की पूरी कहानी और प्रशासन की प्रतिक्रिया।
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नोएडा में छात्र की डूबने से मौत: प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

छात्र की दर्दनाक मौत ने प्रशासनिक दावों को किया सवालिया


उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-126 में एक बार फिर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक छात्र की दुखद मौत ने प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले इंजीनियर युवराज की मौत के बाद खतरनाक स्थानों की पहचान कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया।


पिकनिक के दौरान हुई घटना

जानकारी के अनुसार, एक निजी विश्वविद्यालय के चार छात्र परीक्षा समाप्त होने के बाद सुपरनोवा के पास एक खाली निर्माण स्थल पर घूमने और पिकनिक मनाने गए थे। इस दौरान गाजियाबाद के इंदिरापुरम के निवासी छात्र हर्षित भट्ट ने वहां जमा पानी में नहाने का निर्णय लिया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक वह गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसके दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे।


बचाव कार्य में देरी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय गोताखोर मौके पर पहुंचे। बचाव दल ने काफी मेहनत के बाद हर्षित को पानी से बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं, उसे बचाने के प्रयास में पानी में उतरे उसके तीन अन्य साथियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिनकी स्थिति फिलहाल ठीक बताई जा रही है।


लापरवाही की जांच जारी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, डायल-112 पर सूचना मिलते ही टीम ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। स्थानीय गोताखोरों की मदद से छात्र को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पूरे मामले की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घटना में किस स्तर पर लापरवाही हुई।


इस हादसे ने एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण के दावों की पोल खोल दी है। पहले भी ऐसे 'डेथ पॉइंट्स' को चिन्हित कर उन्हें सुरक्षित बनाने का आश्वासन दिया गया था। नए सीईओ द्वारा भी सख्त निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद खतरनाक निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। नतीजा यह हुआ कि एक और परिवार ने अपने बेटे को खो दिया। यह घटना प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि केवल कागजी दावे नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई जरूरी है।