पंजाब कांग्रेस में उठे विवाद के बीच चन्नी का दलित प्रतिनिधित्व पर सवाल
पंजाब में कांग्रेस की स्थिति
कांग्रेस पार्टी, जो पंजाब में लंबे समय से एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति रही है, ने 2022 के विधानसभा चुनाव में गंभीर हार का सामना किया। उस चुनाव में पार्टी केवल 18 सीटों पर सिमट गई, जिसका मुख्य कारण पार्टी के भीतर की गुटबाजी और नेतृत्व के प्रति असमंजस माना गया। चुनाव से पहले, कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी।
कांग्रेस में फिर से उठे विवाद
अब, चार साल बाद, जैसे-जैसे अगला विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, कांग्रेस के भीतर फिर से खींचतान शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने हाल ही में अनुसूचित जाति विंग की बैठक में सवाल उठाया कि दलित समुदाय को पार्टी में उचित प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल रहा। इस बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें चन्नी ने कहा कि पंजाब में दलितों की जनसंख्या 35 से 38 प्रतिशत है, लेकिन पार्टी के शीर्ष पदों पर अधिकतर लोग अपर कास्ट से हैं। इस बयान ने कांग्रेस को असहज स्थिति में डाल दिया और इसे जट्ट सिख समुदाय के खिलाफ टिप्पणी के रूप में देखा जाने लगा।
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की प्रतिक्रिया
इस बयान के बाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को स्थिति को संभालने के लिए आगे आना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के आंतरिक मुद्दों को सार्वजनिक रूप से नहीं उठाया जाना चाहिए। वड़िंग ने यह भी कहा कि चन्नी कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य हैं, जो पार्टी की सबसे प्रभावशाली संस्था है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने कई वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था, जो यह दर्शाता है कि पार्टी जातिगत भेदभाव नहीं करती।
चन्नी का स्पष्टीकरण
विवाद बढ़ने पर चन्नी ने कहा कि वह कांग्रेस द्वारा दिए गए सम्मान और पद के लिए आभारी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। चन्नी ने कहा कि वह किसी भी जाति या समुदाय के खिलाफ बोलने का सवाल नहीं उठता।
भाजपा का अवसर
इस बीच, भाजपा ने इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश की है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में निर्णय केवल गांधी परिवार द्वारा लिए जाते हैं। उन्होंने चन्नी और अन्य कांग्रेसी नेताओं को भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण भी दिया।
पार्टी के भीतर बेचैनी
कांग्रेस के भीतर इस बयानबाजी को लेकर बेचैनी बढ़ रही है। कई वरिष्ठ नेता आलाकमान को संदेश भेजने की कोशिश कर रहे हैं कि पंजाब कांग्रेस के मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाए। पटियाला से सांसद धर्मवीर गांधी ने चेतावनी दी कि इस तरह के सार्वजनिक विवाद चुनाव से पहले पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
भूपेश बघेल की जिम्मेदारी
कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब में संगठन को संभालने की जिम्मेदारी भूपेश बघेल को सौंपी है, जो राज्य में सक्रिय हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पार्टी 2027 का चुनाव बिना मुख्यमंत्री चेहरे के लड़ेगी। हालांकि, चन्नी की गतिविधियां पार्टी की लाइन से अलग नजर आ रही हैं।
सोशल मीडिया पर चर्चा
सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी चल रही है कि चन्नी कहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह की राह पर तो नहीं बढ़ रहे, जबकि कुछ लोग उनकी तुलना नवजोत सिंह सिद्धू से कर रहे हैं। फिलहाल, सभी की नजरें 23 तारीख को दिल्ली में राहुल गांधी की बैठक पर टिकी हैं, जिसके बाद यह स्पष्ट होगा कि पंजाब कांग्रेस किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
