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पंजाब में किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम: सिंचाई के लिए 8 घंटे की निरंतर बिजली

पंजाब सरकार ने किसानों के उत्थान के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, जिसमें दिन में 8 घंटे की निरंतर बिजली की आपूर्ति और पारदर्शी मुआवजा प्रक्रिया शामिल है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर टीमों को सक्रिय किया है। जानें इस नई पहल के बारे में और कैसे यह किसानों के जीवन को प्रभावित कर रही है।
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पंजाब में किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम: सिंचाई के लिए 8 घंटे की निरंतर बिजली

किसानों को मिल रही नई सुविधाएं

पंजाब के इतिहास में पहली बार, किसानों को सिंचाई के लिए दिन में लगातार 8 घंटे बिजली प्रदान की जा रही है। सरकार ने कई उपेक्षित नहरों को पुनर्जीवित किया है, जिससे खेतों में सिंचाई का पानी फिर से पहुंचने लगा है। गन्ने की फसल के लिए किसानों को 416 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहे हैं, जो कि देश में सबसे अधिक है। इसके अलावा, फसल के नुकसान पर 20,000 रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जा रहा है, जो भारत में सबसे ज्यादा है। पराली जलाने की समस्या को हल करने के लिए 1.58 लाख क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध कराई गई हैं और फसल खरीद का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया गया है।


पारदर्शी मुआवजा प्रक्रिया

पंजाब में बाढ़ राहत मुआवजा प्रक्रिया पहली बार पारदर्शी तरीके से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पूरी की गई है। हर गांव, किसान और परिवार तक राहत पहुंचाने के लिए सरकार ने जमीनी स्तर पर टीमों को सक्रिय किया है। इन टीमों ने सर्वेक्षण किया, डेटा की पुष्टि की और मुआवजे की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे बिचौलियों और देरी की संभावना समाप्त हो गई है।


मुख्यमंत्री का समर्थन

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देश पर, पंजाब में बाढ़ प्रभावित भूमि को फिर से खेती योग्य बनाने का कार्य बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इसके लिए पूरे पंजाब में 'जिसका खेत, उसकी रेत' नीति लागू की गई है। मान सरकार किसानों की भलाई के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मिशन 'चढ़दीकला' के तहत, पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित गांवों को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि पंजाब का किसान कभी अकेला नहीं रहेगा, और सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।