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पंजाब विधानसभा में 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल' पर गरमागरम बहस

पंजाब विधानसभा में 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल' पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने विपक्ष की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस बिल में 'बेअदबी' के मामलों के लिए सख्त सजा का प्रावधान बताया, जिसमें उम्रकैद और भारी जुर्माना शामिल है। चीमा ने नकोदर कांड का जिक्र करते हुए पिछले सरकारों की विफलताओं को उजागर किया और उम्मीद जताई कि राज्यपाल इस बिल को जल्द मंजूरी देंगे। जानिए इस महत्वपूर्ण बिल के बारे में और क्या कहा गया विधानसभा में।
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पंजाब विधानसभा में 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल' पर गरमागरम बहस

मुख्यमंत्री का धन्यवाद और बिल का समर्थन


पंजाब विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा प्रस्तुत 'जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल' के समर्थन में वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह बिल 'बेअदबी' के मामलों में सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संशोधन लाता है।


विपक्ष की आलोचना और ऐतिहासिक सजा का प्रावधान

हरपाल सिंह चीमा ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि यह संशोधन भगवंत मान सरकार का ईमानदार प्रयास है। उन्होंने बताया कि इस बिल में 'बेअदबी' के दोषियों के लिए उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है, और इसे गैर-जमानती अपराध माना गया है।


वित्त मंत्री ने शिरोमणि अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि 'बेअदबी' की घटनाएं हमेशा उसी समय शुरू हुईं जब पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार थी।


नकोदर कांड का जिक्र

उन्होंने 1986 के नकोदर कांड का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय शांतिपूर्ण विरोध कर रहे सिख युवाओं पर पुलिस ने गोली चलाई थी, जिसमें चार युवक शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद जस्टिस गुरनाम सिंह आयोग का गठन किया गया था, लेकिन रिपोर्ट का एक हिस्सा गायब हो गया।


चीमा ने कहा कि पिछले सरकारों ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और दोषियों को महत्वपूर्ण पदों पर रखा गया।


कांग्रेस सरकार की विफलता

कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल विशेष जांच टीमें बनाई, लेकिन कभी भी अदालत में चालान पेश नहीं किए। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में न्याय दिलाने के लिए प्रयास जारी हैं।


पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल का इतिहास इस मामले में दागदार रहा है और उन्होंने उम्मीद जताई कि पंजाब के राज्यपाल बिना किसी देरी के इस बिल को मंजूरी देंगे।