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पंजाब सरकार का खनन क्षेत्र में बड़ा सुधार: अवैध खनन पर लगेगी लगाम

पंजाब सरकार ने खनन क्षेत्र में सुधारों की एक नई नीति लागू की है, जिसका उद्देश्य अवैध खनन पर नियंत्रण और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में, यह नीति उद्योग, विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई है। नए नियमों के तहत, खनन गतिविधियों को कानूनी और पारदर्शी तरीके से संचालित किया जाएगा, जिससे राज्य को अधिक राजस्व प्राप्त होगा और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। इस नीति के तहत लैंड-ओनर माइनिंग साइट्स की शुरुआत से किसानों को भी लाभ होगा।
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पंजाब सरकार का खनन क्षेत्र में बड़ा सुधार: अवैध खनन पर लगेगी लगाम

पंजाब में खनन क्षेत्र में सुधार की दिशा में कदम


पंजाब: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में, पंजाब सरकार ने खनन क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को हल करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संशोधित पंजाब माइनर मिनरल पॉलिसी का उद्देश्य केवल नियमों में बदलाव नहीं करना, बल्कि पूरे सिस्टम को पारदर्शी, प्रतिस्पर्धात्मक और जनहित में बनाना है। इन सुधारों के माध्यम से सरकार कच्चे माल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहती है, ताकि अवैध खनन, कालाबाजारी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके, साथ ही आम उपभोक्ताओं को राहत और राज्य को अधिक राजस्व प्राप्त हो सके।


नीति में संशोधन के पीछे की प्रक्रिया

व्यापक विचार-विमर्श के बाद नीति में संशोधन
नई नीति को लागू करने से पहले सरकार ने विभिन्न स्तरों पर उद्योग, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से बातचीत की। इस संवाद के बाद कैबिनेट ने माइनिंग नीति में ऐसे बदलावों को मंजूरी दी, जिनसे नई खनन श्रेणियां जुड़ीं, नीलामी प्रक्रिया को आधुनिक स्वरूप मिला और मंजूरी से जुड़ी जटिलताओं को कम किया गया। इन सुधारों को पंजाब के माइनिंग सेक्टर में पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।


सरकार का स्पष्ट संदेश

सरकार का रुख: खनन होगा, लेकिन नियमों के तहत
खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल के अनुसार, राज्य सरकार का स्पष्ट संदेश है कि खनन गतिविधियां बंद नहीं होंगी, लेकिन वे पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी ढांचे के भीतर ही संचालित की जाएंगी। सरकार ऑनलाइन और खुली नीलामी प्रणाली को बढ़ावा देकर न केवल राजस्व बढ़ा रही है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि वास्तविक और योग्य ऑपरेटरों को समान अवसर मिले। इस प्रक्रिया से अवैध खनन और बिचौलियों की भूमिका स्वतः सीमित हो जाएगी।


कानूनी खदानों की कमी

सीमित कानूनी खदानें बनीं बड़ी समस्या
पिछले कई वर्षों से पंजाब में अधिकृत माइनिंग साइटों की संख्या बेहद कम रही है। पूरे राज्य में लगभग 35 सक्रिय खदानों के कारण निर्माण क्षेत्र की मांग के मुकाबले कानूनी आपूर्ति काफी कम पड़ रही थी। इस कमी ने अवैध खनन और गैर-नियंत्रित सप्लाई चैनों को बढ़ावा दिया, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ और आम लोगों को महंगे दाम चुकाने पड़े।


कानूनी ढांचे पर जोर

अवैध खनन के बजाय कानूनी ढांचे पर जोर
इस संरचनात्मक समस्या से निपटने के लिए सरकार ने सख्ती के साथ-साथ व्यावहारिक समाधान अपनाया है। अवैध गतिविधियों पर निर्भर रहने के बजाय खनन आपूर्ति को चरणबद्ध तरीके से कानूनी दायरे में लाने की रणनीति बनाई गई है। ऑपरेटरों को प्रोत्साहित किया जा रहा है कि वे आवश्यक दस्तावेज पूरे करें और निर्धारित नियमों के तहत ही काम करें। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना मंजूरी और पारदर्शिता के किसी भी तरह की माइनिंग स्वीकार नहीं की जाएगी।


क्रशर माइनिंग साइटों का महत्व

क्रशर माइनिंग साइटों से स्थानीय उद्योग को राहत
संशोधित नीति का एक अहम पहलू क्रशर माइनिंग साइट्स की शुरुआत है, जिससे क्रशर उद्योग को लंबे समय से चली आ रही कच्चे माल की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। पहले खनन सामग्री की नीलामी सीमित वाणिज्यिक साइटों तक ही थी, जिसके कारण क्रशर मालिकों को या तो सीमित सप्लाई पर निर्भर रहना पड़ता था या अन्य राज्यों से महंगे दामों पर सामग्री मंगानी पड़ती थी। अब जिन क्रशर मालिकों के पास बजरी युक्त जमीन है, वे नियमानुसार माइनिंग लीज़ लेकर उसी सामग्री का उपयोग कर सकेंगे।


आपूर्ति और कीमतों में बदलाव

आपूर्ति बढ़ेगी, कीमतें घटेंगी
क्रशर माइनिंग साइटों से रेत और बजरी की उपलब्धता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है। इससे न केवल विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी, बल्कि अन्य राज्यों पर निर्भरता भी कम होगी। अवैध अंतरराज्यीय खनिज परिवहन पर रोक लगेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और उपभोक्ताओं को कम कीमत पर निर्माण सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। इसके साथ ही राज्य के राजस्व में भी इजाफा होगा।


किसानों को मिलेगी ताकत

लैंड-ओनर माइनिंग साइटों से किसानों को ताकत
नई नीति के तहत लैंड-ओनर माइनिंग साइट्स की शुरुआत किसानों और जमीन मालिकों के लिए बड़ा बदलाव लेकर आई है। पहले रेत खनन के दौरान बाहरी ऑपरेटरों को लेकर भूमि मालिकों में असमंजस रहता था और कई बार वे अपनी जमीन पर खनन की अनुमति देने से कतराते थे। अब भूमि मालिक स्वयं या अधिकृत एजेंट के जरिए सरकार को रॉयल्टी देकर अपनी जमीन से रेत निकाल सकेंगे।


नए अवसरों का निर्माण

एकाधिकार टूटेगा, नए अवसर बनेंगे
लैंड-ओनर माइनिंग साइट्स से कानूनी खनन स्थलों की संख्या बढ़ेगी, जिससे रेत की सप्लाई बेहतर होगी और बाजार में प्रतिस्पर्धा आएगी। इससे कीमतों पर नियंत्रण रहेगा और एकाधिकार खत्म करने में मदद मिलेगी। यह व्यवस्था किसानों और छोटे उद्यमियों के लिए आय के नए स्रोत भी खोलती है।


मंजूरी प्रक्रिया में तेजी

मंजूरी प्रक्रिया में आई तेजी
नई नीति का एक और अहम पहलू पर्यावरणीय और तकनीकी मंजूरियों की प्रक्रिया को सरल बनाना है। पहले इन स्वीकृतियों में कई महीने और वर्षों लग जाते थे, जिससे परियोजनाएं अटक जाती थीं। अब सरकार ने इन प्रक्रियाओं को मिशन मोड में लाकर समयबद्ध निर्णय सुनिश्चित करने की दिशा में काम शुरू किया है, ताकि नियमों से समझौता किए बिना देरी को कम किया जा सके।


नए प्रोजेक्ट्स की उम्मीद

बढ़ती दिलचस्पी और नए प्रोजेक्ट
इन सुधारों का असर यह है कि सरकार को क्रशर माइनिंग साइट्स और लैंड-ओनर माइनिंग साइट्स के तहत सैकड़ों आवेदन मिले हैं। कई मामलों में इरादा पत्र जारी किए जा चुके हैं और बाकी आवेदनों पर प्रक्रिया जारी है। जिलों में नई माइनिंग साइटों की पहचान की जा रही है, जिनके सर्वेक्षण और पर्यावरणीय अध्ययन चल रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले महीनों में बड़ी संख्या में नई खदानें चालू होंगी।


पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया

पारदर्शी नीलामी से बढ़ा भरोसा
पंजाब सरकार ने तीन वर्षों के अंतराल के बाद माइनिंग साइटों के लिए नई पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया शुरू की है। पहले चरण में खुली ऑनलाइन बोली के जरिए कई साइटों की नीलामी की गई, जिससे राज्य को उल्लेखनीय राजस्व प्राप्त हुआ। पुरानी प्रणाली की खामियों को दूर करते हुए नई नीलामी व्यवस्था में मूल्य आधारित बोली, अग्रिम रॉयल्टी और लंबी लीज़ अवधि जैसे प्रावधान किए गए हैं।


जनहित में माइनिंग की दिशा में कदम

स्वच्छ और जनहितैषी माइनिंग की ओर कदम
सीआरएमएस, एलएमएस, तेज मंजूरी प्रक्रियाएं और पारदर्शी नीलामी जैसे सुधार पंजाब के माइनिंग सेक्टर में व्यापक बदलाव का संकेत देते हैं। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है अवैध खनन पर सख्ती, कानूनी आपूर्ति में वृद्धि, राज्य के राजस्व में इजाफा और यह सुनिश्चित करना कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग जनता के हित में, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो।