पंजाब सरकार ने जनहित में दरियाओं की सफाई के लिए नई नीति को दी मंजूरी
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की नई पहल
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में, राज्य मंत्रिमंडल ने एक नई जनहित नीति को स्वीकृति दी है। इस नीति के तहत, भूमि मालिकों को अपनी लागत पर नदियों, नालों और चोओं से गाद निकालने की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही, निकाली गई सामग्री का मुफ्त में उपयोग करने का अधिकार भी प्रदान किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मॉनसून से पहले बाढ़ की तैयारियों को तेज करना और नदियों के प्रवाह को बेहतर बनाना है।
मुख्यमंत्री कार्यालय का बयान
मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा, 'मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने सतलुज, ब्यास और सिसवां नदियों की सफाई के लिए भूमि मालिकों को अनुमति देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।' यह निर्णय मंत्री परिषद की बैठक में लिया गया।
भूमि मालिकों को अपनी लागत पर नदियों, नालों और चोओं की सफाई करने और निकाली गई सामग्री का मुफ्त में उपयोग करने की अनुमति दी गई है।
गाद निकालने की प्रक्रिया का महत्व
मंत्रिमंडल ने सतलुज, ब्यास और सिसवां नदियों से गाद निकालने और निकाली गई सामग्री के मुफ्त उपयोग की नीति को मंजूरी दी है। प्रवक्ता ने बताया कि यह पहल महत्वपूर्ण स्थानों पर गाद हटाने, नदियों के प्रवाह की क्षमता बढ़ाने और बाढ़ के जोखिम को कम करने में सहायक होगी, जिससे सार्वजनिक और निजी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
पंजाब सरकार ने 9 महत्वपूर्ण स्थानों की पहचान की है, जहां आगामी मॉनसून के मद्देनजर पानी के प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए गाद निकालने की आवश्यकता है। यदि इन स्थानों पर गाद निकालने का कार्य नहीं किया गया, तो इससे गाद जमा हो सकती है, जिससे नदियों के प्रवाह की क्षमता में कमी आएगी और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
आरक्षण नियमों में संशोधन
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में कैबिनेट ने ग्राम पंचायतों के सरपंचों और जिला परिषदों के चेयरमैन/वाइस चेयरमैन के लिए पंजाब आरक्षण के नियम-6 में संशोधन को भी मंजूरी दी है।
इस संशोधन का उद्देश्य विभिन्न श्रेणियों में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। इसमें अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जाति की महिलाओं, महिलाओं और सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षण को तर्कसंगत बनाने का प्रयास किया गया है।
