पटना में गैस की कीमतों में वृद्धि: ईरान-अमेरिका तनाव का असर
पटना में गैस की कीमतों में बढ़ोतरी
पटना: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव का प्रभाव अब आम जनता की जेब पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के कारण प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में बाधा आई है, जिसका सीधा असर भारत में गैस की कीमतों पर पड़ा है। बिहार की राजधानी पटना में घरेलू पीएनजी, सीएनजी और औद्योगिक गैस की कीमतों में वृद्धि की गई है। इस वृद्धि के चलते घरों से लेकर परिवहन और होटल उद्योग तक पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना है।
डी-पीएनजी की कीमतों में वृद्धि
पटना में घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (डी-पीएनजी) की कीमतों में वृद्धि की गई है। अब उपभोक्ताओं को प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस के लिए 50 पैसे अधिक चुकाने होंगे। पहले इसकी कीमत 49.44 रुपये प्रति एससीएम थी, जो अब बढ़कर अधिक हो गई है। इस निर्णय का सीधा प्रभाव राजधानी के लगभग 32 हजार घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जो अपने घरों में पाइप्ड गैस का उपयोग करते हैं। गैस की महंगाई से हर महीने का घरेलू बजट प्रभावित हो सकता है।
सीएनजी की कीमतों में वृद्धि
CNG के दाम भी बढ़े
सीएनजी का उपयोग करने वाले वाहन चालकों को भी अब अधिक खर्च करना पड़ेगा। व्यावसायिक कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमत में एक रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है। पटना में अब सीएनजी 89.90 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध होगी, जबकि पहले इसकी कीमत 88.90 रुपये थी। इस वृद्धि का असर लगभग 40 हजार वाहनों पर पड़ने की संभावना है, जिनमें बड़ी संख्या में ऑटो रिक्शा और छोटे व्यावसायिक वाहन शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इसका असर किराए और परिवहन लागत पर भी देखने को मिल सकता है।
होटल और उद्योगों पर असर
होटल और उद्योगों की लागत भी बढ़ेगी
केवल घरेलू उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि होटल, रेस्टोरेंट और उद्योग भी इस वृद्धि से प्रभावित होंगे। व्यावसायिक पाइप्ड नेचुरल गैस (सी-पीएनजी) की कीमत में 5.38 रुपये प्रति एससीएम की वृद्धि की गई है। अब यह गैस 93.27 रुपये प्रति एससीएम की दर से उपलब्ध होगी। इसके अलावा, औद्योगिक पाइप्ड नेचुरल गैस की कीमतों में भी लगभग पांच रुपये प्रति एससीएम का इजाफा हुआ है। उद्योगों को अब यह गैस 85.95 से 86.25 रुपये प्रति एससीएम की दर पर मिलेगी। गैस की महंगाई से होटल, बैंक्वेट हॉल, फैक्ट्री और छोटे उद्योगों की परिचालन लागत बढ़ने की संभावना है। इसका असर आने वाले समय में आम ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है।
ईरान-अमेरिका तनाव का प्रभाव
ईरान-अमेरिका तनाव का असर
गैस कीमतों में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। इस संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। कई समुद्री रास्तों पर दबाव बढ़ने से ईंधन आयात करने वाले देशों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और गैस के दामों में और वृद्धि हो सकती है।
प्रधानमंत्री की अपील
पीएम मोदी ने की बचत की अपील
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ऊर्जा और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। तेलंगाना के हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट को देखते हुए लोगों को फिजूल खर्च से बचना चाहिए। प्रधानमंत्री ने लोगों से अगले एक साल तक विदेश यात्राओं को टालने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत में घूमने के लिए कई खूबसूरत जगहें हैं और लोगों को देश के भीतर पर्यटन को बढ़ावा देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बचत करने, सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने और सोना खरीदने से बचने की भी अपील की।
अमेरिका का ईरान के प्रति रुख
ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव ठुकराया
दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से युद्ध समाप्त करने के लिए भेजे गए प्रस्ताव को अस्वीकार्य बताया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की ओर से भेजे गए संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह प्रस्ताव बिल्कुल पसंद नहीं आया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान की प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है। माना जा रहा है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और ईंधन बाजार पर और गहरा हो सकता है।
