पश्चिम बंगाल चुनाव में नया मोड़: हुमायूं कबीर का AIMIM के साथ गठबंधन
राजनीति में नया बदलाव
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले, राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। मुर्शिदाबाद के नेता हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ गठबंधन करने की घोषणा की है। इस नए गठबंधन के बाद चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प होने की संभावना है। कबीर ने बताया कि उनकी पार्टी AIMIM के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेगी।
उम्मीदवारों की घोषणा
हुमायूं कबीर ने अब तक 15 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है और बाकी सीटों पर भी जल्द ही उम्मीदवारों को उतारने की योजना बनाई है। कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी कुल 154 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। खुद कबीर रेजीनगर सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि आसिफ इकबाल को बरहमपुर सीट से टिकट दिया गया है। इसके अलावा, पूनम बेगम को भवानीपुर सीट से उम्मीदवार बनाया गया है, जहां उनका मुकाबला तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी और बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से होगा। इस कारण यह सीट चर्चा का विषय बन गई है।
ओवैसी का समर्थन
ओवैसी का समर्थन और प्रेस कॉन्फ्रेंस
AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस गठबंधन की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हुमायूं कबीर के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। इसके साथ ही, 25 मार्च को कोलकाता में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की योजना है, जिसमें दोनों नेता आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
बाबरी मस्जिद मुद्दा
‘बाबरी मस्जिद’ मुद्दे पर बयान
हुमायूं कबीर पहले भी बाबरी मस्जिद से जुड़े बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं। उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के समान एक मस्जिद बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ था। कबीर का कहना है कि यह मुद्दा उनके समुदाय के लिए भावनात्मक है और वह इसे लेकर लोगों की भावनाओं को समझते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे का चुनाव पर प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार गठन में भूमिका
सरकार गठन में निर्णायक भूमिका का दावा
कबीर ने यह भी कहा कि यदि उनकी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है, तो भी उनका गठबंधन सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके पास इतनी सीटें होंगी कि बिना उनके समर्थन के कोई भी सरकार नहीं बन पाएगी। यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो राज्य में पहली बार मुस्लिम मुख्यमंत्री बनने की संभावना है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो वह उपमुख्यमंत्री पद की मांग करेंगे।
तृणमूल से दूरी
तृणमूल से दूरी का कारण
यह ध्यान देने योग्य है कि हुमायूं कबीर पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे, लेकिन मतभेदों के कारण उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक दिशा चुनी और अब नए गठबंधन के साथ चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। पश्चिम बंगाल का चुनाव पहले से ही काफी प्रतिस्पर्धी माना जाता है, और नए गठबंधन के साथ राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है।
