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पश्चिम बंगाल चुनाव में मछली का अनोखा प्रचार: भाजपा और टीएमसी की दिलचस्प रणनीति

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस ने मछली को अपने प्रचार का मुख्य हिस्सा बना लिया है। दोनों पार्टियों के उम्मीदवार नववर्ष के अवसर पर मछलियां लेकर रोड शो कर रहे हैं। ममता बनर्जी का आरोप है कि भाजपा सत्ता में आने पर मछली और मांस खाने पर रोक लगाएगी, जबकि भाजपा इसका खंडन कर रही है। इस अनोखे प्रचार ने स्थानीय लोगों का ध्यान आकर्षित किया है, लेकिन कुछ वोटरों का मानना है कि असली मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। जानें इस दिलचस्प चुनावी रणनीति के बारे में।
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पश्चिम बंगाल चुनाव में मछली का अनोखा प्रचार: भाजपा और टीएमसी की दिलचस्प रणनीति

कोलकाता में मछली के साथ चुनावी प्रचार


कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का प्रचार अब एक अनोखे तरीके से चल रहा है। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही पार्टियां मछली को अपने चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। बंगाली नववर्ष के अवसर पर, दोनों दलों के उम्मीदवारों ने मछली लेकर रोड शो किया, जिसने लोगों को चौंका दिया।


ममता बनर्जी का आरोप और भाजपा का जवाब

ममता बनर्जी अपने हर भाषण में यह दावा कर रही हैं कि यदि भाजपा सत्ता में आई, तो बंगाल के लोग मछली और मांस नहीं खा सकेंगे। इस आरोप का खंडन करने के लिए भाजपा ने एक अनोखा प्रचार अभियान शुरू किया।


कोलकाता पोर्ट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार राकेश सिंह ने नववर्ष के दिन पारंपरिक धोती-कुर्ता पहनकर मछलियां लेकर प्रचार किया। उन्होंने लोगों से कहा कि भाजपा की सरकार बनने पर मछली खाना कभी नहीं रुकेगा। यह प्रचार बंगाल की मछली प्रेमी संस्कृति को बचाने का संदेश दे रहा था।


राकेश सिंह ने टीएमसी के उम्मीदवार फिरहाद हकीम पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों में उन्होंने क्षेत्र के लिए कुछ नहीं किया। युवाओं को रोजगार नहीं मिला और विकास कार्य भी ठप रहे। इसलिए इस बार लोग भाजपा के साथ हैं।


टीएमसी का जवाबी प्रचार

टीएमसी भी इस मुद्दे पर पीछे नहीं रही। टॉलीगंज विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी के उम्मीदवार अरूप बिस्वास ने भी नववर्ष के दिन मछलियां लेकर प्रचार किया। उन्होंने वोटरों को चेतावनी दी कि यदि भाजपा सत्ता में आई, तो बंगालियों का मछली और मांस खाना बंद हो जाएगा।


इस प्रकार, दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए मछली को अपने चुनावी प्रचार का मुख्य हिस्सा बना रही हैं। बंगाल की संस्कृति में मछली का विशेष महत्व है, इसलिए यह मुद्दा लोगों को सीधे प्रभावित कर रहा है।


वोटरों की प्रतिक्रिया

कोलकाता पोर्ट क्षेत्र के स्थानीय निवासियों का कहना है कि बंगालियों को मछली और मांस खाने से कोई नहीं रोक सकता। कई वोटरों ने इस अनोखे प्रचार को मजेदार बताया, लेकिन कुछ ने यह भी कहा कि असली मुद्दों जैसे रोजगार, सड़क और विकास पर भी ध्यान देना चाहिए।


पश्चिम बंगाल चुनाव में इस बार प्रचार के तरीके काफी अलग और आकर्षक हो गए हैं। मछली वाला यह अनोखा तरीका सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। दोनों पार्टियां अपनी बात को मजबूती से रख रही हैं, लेकिन अंतिम निर्णय वोटर ही करेंगे।