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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी की बैठक में कम विधायक, आंदोलन की तैयारी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की बैठक में केवल 20 विधायकों की उपस्थिति ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। पार्टी ने इस स्थिति को खारिज करते हुए कहा कि कई विधायक जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शनों में व्यस्त थे। टीएमसी ने अगले दो दिनों में आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है, जिसमें ममता बनर्जी खुद धरना देंगी। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और टीएमसी की रणनीतियों के बारे में।
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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी की बैठक में कम विधायक, आंदोलन की तैयारी

कोलकाता में टीएमसी की बैठक में हलचल


कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस समय हलचल मच गई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित निवास पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नव निर्वाचित विधायकों की बैठक निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। इस बैठक में अपेक्षा के अनुसार बहुत कम विधायक पहुंचे। कुल 80 विधायकों में से केवल लगभग 20 की उपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को बढ़ावा दिया। हालांकि, पार्टी ने इस स्थिति पर उठ रहे सवालों को तुरंत खारिज कर दिया और कहा कि कई विधायक जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शनों और संगठनात्मक कार्यों में व्यस्त थे।


पार्टी प्रवक्ता का स्पष्टीकरण

पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में पार्टी नेताओं पर हुए हमलों और उसके बाद की स्थिति के कारण कई विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में रहना पड़ा। उन्होंने बताया कि शनिवार को अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले और अगले दिन सांसद कल्याण बनर्जी से जुड़े घटनाक्रम के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर स्थिति संभालने की आवश्यकता महसूस हुई। कई विधायक अपने क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहे थे और पुलिस कार्रवाई के बाद कार्यकर्ताओं की मदद कर रहे थे, इसलिए वे कालीघाट की बैठक में शामिल नहीं हो सके।


आंदोलन को और तेज करने की योजना

बैठक न होने के बावजूद, टीएमसी ने अगले दो दिनों में अपने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है। कुणाल घोष ने बताया कि सोमवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में ब्लॉक और वार्ड स्तर पर विरोध रैलियां आयोजित की जाएंगी। पार्टी का कहना है कि ये प्रदर्शन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों के खिलाफ होंगे। टीएमसी ने आरोप लगाया है कि चुनाव के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।


ममता बनर्जी का नेतृत्व

टीएमसी ने मंगलवार को कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित रानी रश्मोनी रोड पर एक दिवसीय प्रतीकात्मक धरने की भी घोषणा की है, जिसका नेतृत्व स्वयं ममता बनर्जी करेंगी। कुणाल घोष ने कहा कि यह धरना केवल नेताओं पर हुए हमलों के विरोध तक सीमित नहीं होगा, बल्कि चुनाव के बाद की कथित हिंसा और कुछ क्षेत्रों में फेरीवालों को हटाने के लिए चलाए जा रहे अभियानों के खिलाफ भी आवाज उठाएगा। पार्टी इसे जनता तक अपनी बात पहुंचाने और संगठन को सक्रिय रखने का एक साधन मान रही है।


अनौपचारिक चर्चा का आयोजन

हालांकि विधायकों की औपचारिक बैठक रद्द कर दी गई, लेकिन सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कालीघाट पहुंचे नेताओं के साथ अलग से बातचीत की। इस दौरान मौजूदा राजनीतिक हालात और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। पार्टी नेताओं का कहना है कि कम संख्या में विधायकों की उपस्थिति को किसी अंदरूनी असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि संगठन इस समय जमीनी स्तर पर सक्रिय है और सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।