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पीएम मोदी की इजरायल यात्रा: नेसेट में मिला सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल की संसद नेसेट को संबोधित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत और इजरायल के सहयोग की बात की। उन्होंने इस यात्रा के दौरान 'स्पीकर ऑफ द नेसेट' का सम्मान प्राप्त किया, जिससे वे इस सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। मोदी ने इजरायल को नवाचार की महाशक्ति बताया और स्थायी शांति के लिए भारत के समर्थन की पुष्टि की। जानें इस यात्रा की अन्य महत्वपूर्ण बातें।
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पीएम मोदी की इजरायल यात्रा: नेसेट में मिला सम्मान

पीएम मोदी का इजरायल दौरा


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्तमान में इजरायल की दो दिवसीय यात्रा पर हैं। उन्होंने अपनी यात्रा के पहले दिन इजरायली संसद नेसेट को संबोधित किया। अपने भाषण की शुरुआत पीएम मोदी ने 'शालोम' और 'नमस्ते' से की। उन्होंने कहा कि इस संसद के सामने खड़े होना उनके लिए गर्व की बात है।


मोदी ने कहा कि यह उनके लिए सम्मान की बात है कि वे 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर आए हैं। उन्होंने इजरायल की अपनी पहली यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उनका जन्मदिन उसी दिन है जब भारत ने इजरायल को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी।


इजरायली संसद में पीएम मोदी को 'स्पीकर ऑफ द नेसेट' का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ, जिससे वे इस सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए।


भारत-इजरायल सहयोग

पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत और इजरायल के सहयोग की बात की। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद विरोधी सभी प्रयासों में इजरायल के साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ निरंतर और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।


उन्होंने इजरायल को 'नवाचार और तकनीकी नेतृत्व की महाशक्ति' बताया और कहा कि यह एक स्वाभाविक साझेदारी का आधार बनाता है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मोदी के आगमन पर अपनी खुशी व्यक्त की।


स्थायी शांति की दिशा में भारत का समर्थन

पीएम मोदी ने कहा कि भारत क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता लाने वाले सभी प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने 2006 में अपनी पहली यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि तब इजरायल में योग के केवल कुछ केंद्र थे, जबकि अब हर जगह योग का अभ्यास हो रहा है।


उन्होंने यह भी बताया कि आयुर्वेद में इजरायल की रुचि बढ़ रही है। पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर संगठित प्रयासों की आवश्यकता है, क्योंकि आतंकवाद कहीं भी शांति के लिए खतरा है।