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बिजनौर के मंदिर में चमत्कारी कुत्ते की पूजा: आस्था या अंधविश्वास?

बिजनौर के नंदपुर गांव में एक कुत्ते ने पांच दिनों तक हनुमान जी और मां दुर्गा की मूर्तियों की परिक्रमा की, जिससे श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग इसे चमत्कारी मानकर पूजा कर रहे हैं। इस घटना ने आस्था और विज्ञान के बीच बहस को जन्म दिया है। जानें इस अनोखी घटना के बारे में और कैसे कुत्ते की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर डॉक्टरों ने कदम उठाए।
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बिजनौर के मंदिर में चमत्कारी कुत्ते की पूजा: आस्था या अंधविश्वास?

बिजनौर में अनोखी घटना


बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नंदपुर गांव में एक अद्भुत घटना ने सभी का ध्यान खींचा है। यहां के एक प्राचीन मंदिर में एक कुत्ता चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कुत्ता लगातार पांच दिनों तक हनुमान जी और मां दुर्गा की मूर्तियों के चारों ओर चक्कर लगाता रहा, बिना कुछ खाए-पिए।


मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़

इस घटना के बाद, न केवल गांव के लोग बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर आने लगे हैं। कुत्ते को 'चमत्कारी' मानकर उसकी पूजा की जा रही है, जिससे मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल बन गया है।


कुत्ते की परिक्रमा

ग्रामीणों के अनुसार, कुत्ता पिछले पांच दिनों से मंदिर में मौजूद रहा और मूर्तियों के चारों ओर चक्कर लगाता रहा। इस दौरान उसने न तो कुछ खाया और न ही पानी पिया। जब वह कमजोरी के कारण गिर पड़ा, तो मंदिर कमेटी ने उसे सम्मान के साथ गद्दे पर लिटाया और रजाई ओढ़ा दी। इस दृश्य ने श्रद्धालुओं की भीड़ को और बढ़ा दिया।


कुत्ते की पूजा और चढ़ावा

यहां तक कि अब श्रद्धालु भगवान के साथ-साथ कुत्ते के आगे भी मत्था टेक रहे हैं। लोग उसके सामने प्रसाद चढ़ा रहे हैं और पैसे अर्पित कर रहे हैं। कई श्रद्धालु इसे दैवीय कृपा मानते हुए कुत्ते से मन्नतें मांग रहे हैं। मंदिर के बाहर खिलौनों और प्रसाद की दुकानें भी सज गई हैं, जिससे माहौल पूरी तरह धार्मिक आयोजन जैसा हो गया है।


कुत्ते की स्वास्थ्य स्थिति

लगातार भूखे रहने के कारण कुत्ते की स्थिति गंभीर हो गई। उसने दूध और रोटी खाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पशु चिकित्सकों को बुलाया गया। डॉक्टर ने बताया कि कुत्ते ने कई दिनों से कुछ नहीं खाया है, जिससे उसके शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी हो गई है। उसकी जान बचाने के लिए उसे ग्लूकोज, मल्टी-विटामिन की ड्रिप और फ्रूट थेरेपी दी जा रही है।


आस्था और विज्ञान का टकराव

वर्तमान में, मंदिर में आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा धुंधली होती नजर आ रही है। एक ओर विज्ञान इसे कुत्ते की शारीरिक स्थिति से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालुओं की भीड़ इसे चमत्कार मान रही है।