बिहार में शराबबंदी पर जीतन राम मांझी का नया बयान: गरीबों पर पड़ रहा है भारी असर
जीतन राम मांझी का बयान
पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हम पार्टी के नेता जीतन राम मांझी ने शराबबंदी नीति पर अपनी चिंताओं को एक बार फिर व्यक्त किया है। पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि नीति तो सही है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका पूरी तरह से गलत है। इसका सबसे अधिक प्रभाव गरीब वर्ग पर पड़ रहा है।
गरीबों पर दोहरी मार
मांझी ने कहा कि शराबबंदी के कारण गरीबों को दोहरी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस और कानूनी कार्रवाई में गरीब लोग छोटी-मोटी शराब रखने या पीने के कारण फंस रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। वहीं, राज्य में अवैध शराब का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। माफिया लोग जहरीली शराब बनाने के लिए यूरिया और खतरनाक रसायनों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे गरीबों की जान जा रही है।
उन्होंने बताया कि कई गरीब लोग 50-60 साल की उम्र में ही इस जहरीली शराब के सेवन से दम तोड़ देते हैं। मांझी का कहना है कि अमीर लोग आसानी से शराब प्राप्त कर लेते हैं, जबकि गरीब मजदूर थकान मिटाने के लिए थोड़ी शराब लेते हैं तो उन्हें तुरंत पकड़ा जाता है।
नई सरकार से उम्मीदें
हाल ही में बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने हैं। मांझी ने उनसे बड़ी उम्मीदें जताई हैं। उन्होंने कहा कि नई सरकार को शराबबंदी कानून की पूरी समीक्षा करनी चाहिए। गड़बड़ियों को दूर किया जाए, ताकि राज्य का राजस्व भी बढ़े और गरीबों को बेवजह परेशान न किया जाए।
मांझी ने जोर देकर कहा कि शराब तस्करों और माफिया पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, उनकी संपत्ति जब्त की जाए, लेकिन आम गरीबों को इस नीति के तहत न सताया जाए।
तेजस्वी यादव के आरोपों का जवाब
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा केंद्र की एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगाने पर मांझी ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी की राजनीति उलझी हुई बातों पर आधारित है। ईडी और आयकर विभाग की छापेमारी सामान्य प्रक्रिया है। अगर कोई गलत काम कर रहा है तो एजेंसियां अपना काम करेंगी। इसमें राजनीति देखना गलत है।
मांझी का यह बयान बिहार में शराबबंदी पर चल रही बहस को फिर से गरमा गया है। अब कई लोग नई सरकार से इस नीति में बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि गरीबों का शोषण रुके और अवैध शराब का कारोबार समाप्त हो।
