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बोडोलैंड विधानसभा चुनाव: स्थानीय मुद्दों पर आधारित चुनावी समीकरण

बोडोलैंड विधानसभा चुनाव 2023 में स्थानीय मुद्दों और राजनीतिक समीकरणों का महत्वपूर्ण स्थान है। इस क्षेत्र में पहचान की राजनीति, भूमि विवाद, और विकास जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। बीपीएफ और यूपीपीएल के बीच सीधा मुकाबला है, जबकि कांग्रेस को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। जानें इस चुनाव में कौन सी पार्टी को मिल सकता है लाभ और क्या हैं चुनावी समीकरण।
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बोडोलैंड विधानसभा चुनाव: स्थानीय मुद्दों पर आधारित चुनावी समीकरण

बोडोलैंड का राजनीतिक परिदृश्य

ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे पर बोडोलैंड असम की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसे बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र या BTR के नाम से भी जाना जाता है। यह असम का एक स्वायत्त क्षेत्र है, जिसमें कोकराझार, चिरांग, उदालगुड़ी, बक्सा और तामुलपुर जैसे पांच जिले शामिल हैं। इस क्षेत्र में विधानसभा की कुल 15 सीटें हैं, और यहां के मुद्दे असम के अन्य हिस्सों से भिन्न हैं। लंबे समय से हिंसा का सामना कर रहे इस क्षेत्र में अलग राज्य की मांग को लेकर संघर्ष जारी है। ऐसे में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में इन 15 सीटों का परिणाम महत्वपूर्ण हो सकता है।


बोडोलैंड का ऐतिहासिक संदर्भ

बोडोलैंड की राजनीति को समझने के लिए इसके इतिहास को जानना आवश्यक है। यह इतिहास बोडो जनजाति की पहचान, अधिकार और स्वायत्तता की मांग से जुड़ा हुआ है। 1980 के दशक में ऑल बोडो स्टूडेंट यूनियन (ABSU) के नेतृत्व में अलग बोडोलैंड राज्य की मांग उठी, जो कई बार हिंसक आंदोलनों में बदल गई। 1993 में पहला बोडो समझौता हुआ, लेकिन इससे स्थायी समाधान नहीं निकला। इसके बाद 2003 में भारत सरकार, असम सरकार और बोडो लिब्रेशन टाइगर्स के बीच समझौते से बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (BTC) का गठन हुआ, जिससे क्षेत्र को स्वायत्त शासन मिला। 2020 में हुए नए समझौते के तहत बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) को और मजबूत किया गया।


चुनावी मुद्दे


  • बोडो और गैर-बोडो के बीच पहचान की राजनीति प्रमुख मुद्दा है।

  • भूमि और अतिक्रमण हटाने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।

  • शांति और सुरक्षा बनाए रखना प्राथमिकता है।

  • विकास, जैसे सड़क, शिक्षा और रोजगार पर जोर दिया जा रहा है।

  • 2020 के बोडो समझौते को लागू करने पर बहस चल रही है।

  • BPF और UPPL के बीच सीधा मुकाबला है।

  • गठबंधन टूटने से त्रिकोणीय चुनावी स्थिति बन गई है।


चुनावी समीकरण

BTR क्षेत्र में कुल 15 विधानसभा सीटें हैं, जहां क्षेत्रीय पार्टियों और दोनों गठबंधनों के बीच मुकाबला हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के बीच गठबंधन है। हालांकि, इस बार बीजेपी की पुरानी सहयोगी यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) सभी 15 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है। बीजेपी 5 सीटों पर और बीपीएफ 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस 15 में से 13 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि अन्य दो सीटों पर राजोर दल और टीएमसी (जी) चुनाव लड़ रहे हैं।


किस पार्टी को मिल सकता है लाभ?

बोडो क्षेत्र में चुनाव असम के अन्य हिस्सों से भिन्न होते हैं। यहां चुनाव स्थानीय मुद्दों पर आधारित होते हैं। बीपीएफ और यूपीपीएल प्रमुख पार्टियां हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में बीपीएफ हाग्रामा मोहिलारी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा थे, लेकिन अब वे सीएम हिमंत के सहयोगी हैं। बीजेपी राज्य में बड़ी पार्टी है, लेकिन इस क्षेत्र में बीपीएफ की स्थिति मजबूत है। प्रमोद बोरो, जो यूपीपीएल के प्रभावशाली नेता हैं, ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया है। कांग्रेस को इस क्षेत्र में झटका लग सकता है, क्योंकि उनकी पुरानी सहयोगी बीपीएफ अब बीजेपी के साथ है।


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बोडोलैंड विधानसभा चुनाव: स्थानीय मुद्दों पर आधारित चुनावी समीकरण


पीएम मोदी के साथ हाग्रामा मोहिलारी



बोडोलैंड विधानसभा चुनाव: स्थानीय मुद्दों पर आधारित चुनावी समीकरण


परिवार के साथ प्रमोद बोरा