भवानीपुर: पश्चिम बंगाल की राजनीति का दिल, ममता बनर्जी का गढ़
भवानीपुर का राजनीतिक महत्व
भवानीपुर: पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र का एक विशेष स्थान है। यह केवल एक चुनावी क्षेत्र नहीं है, बल्कि राज्य की राजनीतिक परिवर्तन की कहानी का प्रतीक है, जिसने कांग्रेस के प्रभुत्व से लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उदय तक का सफर देखा है।
कांग्रेस का गढ़
भवानीपुर सीट लंबे समय तक कांग्रेस का प्रमुख केंद्र रही है। यहां से पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे ने चुनाव जीते, जबकि मीरा दत्ता गुप्ता और रथिन तालुकदार जैसे नेताओं ने भी इस सीट का प्रतिनिधित्व किया।
1969 में वामपंथियों ने थोड़े समय के लिए इस सीट पर कब्जा किया, जब इसका नाम बदलकर कालीघाट कर दिया गया था। उस समय CPI(M) नेता साधन गुप्ता ने जीत हासिल की थी।
1972 में सीट का अस्तित्व समाप्त
1972 में परिसीमन के बाद यह सीट चुनावी नक्शे से हटा दी गई और लगभग चार दशकों तक इसका अस्तित्व नहीं रहा। 2011 में इसे फिर से बहाल किया गया, जब राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा था।
इस समय ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC का उदय हुआ और वाम मोर्चा के 34 साल के शासन का अंत हुआ।
TMC का उदय और ममता का विजय
2011 के चुनाव में TMC ने सुब्रत बख्शी को मैदान में उतारा, जिन्होंने 64% से अधिक वोटों के साथ बड़ी जीत हासिल की। इसके बाद बख्शी ने सीट छोड़ दी और ममता बनर्जी ने उपचुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया।
उपचुनाव में ममता को लगभग 77% वोट मिले और उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को 54,000 से अधिक वोटों से हराया। तब से भवानीपुर TMC का अजेय गढ़ बन गया है।
चुनावी मुकाबले और जीत की श्रृंखला
2016 में कांग्रेस और वाम दलों के गठबंधन ने ममता बनर्जी के खिलाफ दीपा दासमुंशी को उतारा, लेकिन ममता ने आसानी से जीत हासिल की।
2021 में ममता ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा, जबकि भवानीपुर से शोभनदेव चट्टोपाध्याय मैदान में थे। उपचुनाव में ममता ने BJP की प्रियंका टिबरेवाल को 58,000 से अधिक वोटों से हराकर अपनी स्थिति को और मजबूत किया।
भवानीपुर की सामाजिक संरचना
भवानीपुर क्षेत्र कोलकाता नगर निगम के वार्डों से मिलकर बना है, जहां बंगाली मध्यम वर्ग, हिंदी भाषी व्यापारी और मुस्लिम समुदाय का मिश्रण है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विविधता ममता बनर्जी की राजनीति को मजबूती प्रदान करती है।
विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती के अनुसार, "भवानीपुर दक्षिण कोलकाता के मिले-जुले कल्चर को दर्शाता है। ममता बनर्जी ने यहां लोगों से ऐसा निजी राजनीतिक जुड़ाव बनाया है जो सभी समुदायों को जोड़ता है।"
2026 चुनाव की तैयारी
2026 विधानसभा चुनाव से पहले भवानीपुर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि ममता बनर्जी यहां से चुनाव लड़ सकती हैं, जबकि BJP इस सीट पर मजबूत चुनौती देने की योजना बना रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह मुकाबला केवल एक सीट का नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने वाला हो सकता है।
