भारत में मॉनसून की दस्तक, गर्मी से परेशान लोग
मॉनसून का आगमन और गर्मी की स्थिति
नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने देश में अपनी गति पकड़ ली है, जबकि उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्से भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार को मॉनसून ने दक्षिण-पूर्व अरब सागर, बंगाल की खाड़ी के कुछ क्षेत्रों, अंडमान सागर और पूरे निकोबार द्वीप समूह में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में 22 मई तक लू चलने की चेतावनी जारी की गई है।
गर्मी से प्रभावित राज्य
मौसम विभाग ने बताया है कि अगले तीन से चार दिनों में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए सभी परिस्थितियां अनुकूल हैं। दूसरी ओर, उत्तर भारत में तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को परेशान कर दिया है। विशेष रूप से राजस्थान और उत्तर प्रदेश में तापमान में और वृद्धि की संभावना है।
लू का अलर्ट
आईएमडी ने पश्चिम राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और छत्तीसगढ़ में अगले एक सप्ताह तक लू और भीषण लू चलने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग के अनुसार, राजस्थान में 21 और 22 मई को गर्मी अपने चरम पर पहुंच सकती है। उत्तर प्रदेश में 19 से 22 मई के बीच तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
मॉनसून की प्रगति
मॉनसून के आगे बढ़ने की संभावनाएं
आईएमडी ने बताया कि अगले तीन-चार दिनों में मॉनसून दक्षिण-पूर्वी अरब सागर, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। इसके अलावा, अंडमान द्वीप समूह और अंडमान सागर के शेष क्षेत्रों में भी मॉनसून पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा है कि क्षेत्र में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए सभी मानदंड पूरे हो रहे हैं।
केरल में मॉनसून की समय से पहले दस्तक
केरल में मॉनसून का आगमन
आईएमडी ने शुक्रवार को कहा था कि केरल में 26 मई की सुबह दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के पहुंचने की संभावना है। आमतौर पर, केरल में मॉनसून की शुरुआत 1 जून को होती है, जो देश में बारिश के मौसम की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।
अल नीनो का प्रभाव
अल नीनो क्या है?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है, जो तब बनता है जब भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। यह समुद्र का तापमान पूरी दुनिया के मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है। इसके प्रभाव से कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी और सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
अल नीनो का प्रभाव कब तक रहता है?
अल नीनो हर 2 से 7 साल के बीच विकसित होता है और इसका प्रभाव लगभग 9 से 12 महीने तक बना रह सकता है। इसकी तीव्रता महासागर के तापमान में वृद्धि से निर्धारित होती है। जब तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तब इसे कमजोर अल नीनो माना जाता है। वहीं, अगर तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ जाए तो उसे सुपर अल नीनो कहा जाता है। नई रिपोर्ट में तापमान वृद्धि की आशंका जताई गई है।
