महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव: क्या बीएमसी पर कब्जा बनाएगा भाजपा का भविष्य?
महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों का महत्व
महाराष्ट्र में होने वाले नगर निगम चुनाव केवल स्थानीय सत्ता की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की राजनीति के भविष्य को भी आकार देने वाले महत्वपूर्ण मुकाबले बन चुके हैं। इन चुनावों में कई प्रमुख नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है, और सबसे ज्यादा ध्यान मुंबई नगर निगम (बीएमसी) पर केंद्रित है, जिसे हमेशा से राजनीतिक शक्ति का केंद्र माना जाता रहा है।
देवेंद्र फडणवीस की रणनीति
भाजपा के नेता देवेंद्र फडणवीस ने सभी 29 नगर निगमों में जीत सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक योजना बनाई है। चुनाव प्रचार से लेकर गठबंधन प्रबंधन तक, उनकी भूमिका हर स्तर पर महत्वपूर्ण रही है। बीएमसी पर उनका ध्यान विशेष रूप से केंद्रित है, जहां पिछले 25 वर्षों से शिवसेना का दबदबा रहा है। 2017 में भाजपा बीएमसी में सत्ता के करीब पहुंच गई थी, लेकिन तब फडणवीस ने अपने सहयोगी शिवसेना के साथ टकराव से बचने का निर्णय लिया। अब, शिवसेना के विभाजन और उद्धव ठाकरे के साथ संबंधों में खटास के चलते भाजपा के पास मुंबई पर नियंत्रण पाने का एक सुनहरा अवसर है। बीएमसी में जीत फडणवीस को महाराष्ट्र का प्रमुख नेता बना सकती है।
उद्धव ठाकरे की अस्तित्व की लड़ाई
शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई के समान है। 2022 में पार्टी के विभाजन और 2024 के विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद, बीएमसी उनके लिए अंतिम मजबूत किला बचा है। यदि वे मुंबई पर नियंत्रण खोते हैं, तो यह न केवल राजनीतिक नुकसान होगा, बल्कि उनके 'भूमिपुत्र' और मराठी पहचान के दावों को भी गंभीर चोट पहुंचेगी। इसलिए, उन्होंने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ समझौता किया है ताकि मराठी वोटों को एकजुट किया जा सके। बीएमसी में जीत से उद्धव को राज्य की राजनीति में पुनः मजबूती मिल सकती है।
एकनाथ शिंदे का दृष्टिकोण
उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे भी इस चुनाव को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं। पहले चरण में स्थानीय निकाय चुनावों में मिली सफलता के बाद, वे उसी लय को बनाए रखना चाहते हैं। उनका ध्यान विशेष रूप से मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और नवी मुंबई पर है। यदि महायुति गठबंधन मुंबई में जीत हासिल करता है, तो यह उद्धव ठाकरे पर शिंदे की निर्णायक बढ़त मानी जाएगी।
अजीत पवार की रणनीति
उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने भी अपनी रणनीति कुछ महत्वपूर्ण नगर निगमों पर केंद्रित की है। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ उनके लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बने हुए हैं। भाजपा के साथ तनाव और अपने चाचा शरद पवार के साथ बढ़ती नजदीकियों के बीच, अजीत पवार का यह कदम उनकी राजनीतिक दिशा को लेकर अटकलें बढ़ा रहा है।
राज ठाकरे का पुनरुत्थान
राज ठाकरे के लिए बीएमसी चुनाव राजनीतिक पुनरुत्थान का एक अवसर है। 2024 में विधानसभा में खाता तक न खोल पाने के बाद, उन्होंने उद्धव ठाकरे के साथ हाथ मिलाया है। यदि यह गठबंधन सफल होता है, तो एमएनएस को नई ऊर्जा मिलेगी।
मुंबई कांग्रेस की चुनौती
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ के सामने भी बड़ी चुनौती है। कांग्रेस शहर में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है, लेकिन संगठनात्मक कमजोरी और गठबंधन को लेकर असमंजस उसकी राह मुश्किल बना रहे हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, ये नगर निगम चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण गढ़ सकते हैं और कई बड़े नेताओं के भविष्य का फैसला कर सकते हैं।
