महाराष्ट्र में भाजपा-कांग्रेस गठबंधन पर फडणवीस का कड़ा रुख: क्या है मामला?
राजनीतिक हलचल का नया दौर
महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति में अचानक से उठापटक देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाजपा की कुछ स्थानीय शाखाओं द्वारा किए गए गठबंधनों पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अंबरनाथ में कांग्रेस और अकोट में एआईएमआईएम के साथ सभी समझौतों को तुरंत समाप्त किया जाए। यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब राज्य में नगर निकाय चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं।
विवाद की शुरुआत
यह विवाद तब उभरा जब मीडिया में यह खबर आई कि भाजपा ने अपने वैचारिक विरोधियों के साथ हाथ मिलाया है। अंबरनाथ में कांग्रेस और अकोट में एआईएमआईएम के साथ गठबंधन की खबरों ने सत्तारूढ़ गठबंधन में असहजता पैदा कर दी। शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे और सांसद श्रीकांत शिंदे ने इन घटनाओं की आलोचना की और भाजपा के निर्णयों पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्थानीय नेतृत्व के इस तरह के निर्णयों को अनुशासनहीनता करार दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी की नीति के खिलाफ जाकर कोई भी गठबंधन स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस या एआईएमआईएम जैसे दलों के साथ किसी भी स्तर पर गठजोड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी नेता ने ऐसा निर्णय लिया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नगर निकाय चुनावों का प्रभाव
पिछले महीने हुए नगर परिषद और नगर निगम चुनावों के बाद बने समीकरणों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। अंबरनाथ में भाजपा ने कांग्रेस और अजीत पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' बनाई और नगर परिषद की सत्ता अपने हाथ में ले ली। भाजपा पार्षद तेजश्री करंजुले पाटिल को परिषद अध्यक्ष चुना गया, जबकि शिवसेना की उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा।
शिवसेना की तीखी प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर शिवसेना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेताओं ने इसे अनैतिक और अवसरवादी राजनीति करार दिया, यह कहते हुए कि भाजपा एक ओर 'कांग्रेस-मुक्त भारत' की बात करती है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के सहारे सत्ता बनाए रखना चाहती है। इस विवाद ने महाराष्ट्र की नगर निकाय राजनीति में वैचारिक स्थिरता और गठबंधन की नैतिकता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
