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मुंबई में बीएमसी चुनाव: ठाकरे बंधुओं के लिए अस्तित्व की लड़ाई

मुंबई में बीएमसी चुनाव 2024 ने ठाकरे बंधुओं के लिए अस्तित्व की लड़ाई का रूप ले लिया है। इस चुनाव में बीजेपी की बढ़ती ताकत और अन्य राजनीतिक दलों की भूमिका पर चर्चा की गई है। चुनाव के परिणामों का इंतजार है, जो यह तय करेगा कि मुंबई की सत्ता किसके हाथ में जाएगी। क्या उद्धव और राज ठाकरे अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत कर पाएंगे? जानें इस महत्वपूर्ण चुनाव के बारे में।
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मुंबई में बीएमसी चुनाव: ठाकरे बंधुओं के लिए अस्तित्व की लड़ाई

बीएमसी चुनाव का ऐतिहासिक क्षण


मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव आखिरकार 15 जनवरी को संपन्न हुए, जो लगभग चार साल के लंबे इंतजार के बाद हुए। पिछला चुनाव 2017 में हुआ था, और निर्वाचित सदन का कार्यकाल मार्च 2022 में समाप्त हो गया था। कानूनी और प्रशासनिक कारणों से चुनाव में देरी हुई, जिसके बाद अब मुंबई के मतदाताओं को अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने का अवसर मिला।


मतदाता और मतदान केंद्र

इस बार बीएमसी चुनाव में लगभग 1 करोड़ 3 लाख मतदाता पंजीकृत हुए थे। मतदान के लिए मुंबई में 10,232 मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे। बीएमसी में कुल 227 कॉर्पोरेटर चुने जाते हैं, और किसी भी दल या गठबंधन को महापौर बनने के लिए 114 सीटों की आवश्यकता होती है। इस चुनाव में लगभग 1,700 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी हुई है।


ऐतिहासिक चुनाव की विशेषताएँ

बदले हालात में पहला बीएमसी चुनाव


यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक है। पिछले तीन दशकों से बीएमसी पर शिवसेना का वर्चस्व रहा है, लेकिन अब शिवसेना के दो धड़ों में विभाजन के बाद यह पहला चुनाव है। सत्तारूढ़ महायुति के तहत भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा है।


राजनीतिक गठबंधन और उम्मीदवार

दूसरी ओर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) का साथ आना इस चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना मानी जा रही है। लगभग 20 साल बाद ठाकरे परिवार के दो प्रमुख नेता- उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे बीएमसी चुनाव में एक साथ नजर आए।


किस दल ने कितनी सीटों पर लड़ा चुनाव


बीएमसी के 227 वार्डों में बीजेपी ने 137 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा। एनसीपी ने 90 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए, जबकि शिवसेना (यूबीटी) ने 163 सीटों पर चुनाव लड़ा। एमएनएस ने 52 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, और कांग्रेस ने 143 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए।


ठाकरे बंधुओं के लिए चुनाव का महत्व

ठाकरे बंधुओं के लिए क्यों अहम है यह चुनाव


विश्लेषकों के अनुसार, बीएमसी चुनाव उद्धव और राज ठाकरे दोनों के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। 2024 के विधानसभा चुनाव में उद्धव की पार्टी को सीमित सफलता मिली थी, जबकि राज की एमएनएस को एक भी सीट नहीं मिली। बीएमसी हमेशा से शिवसेना की राजनीतिक ताकत का केंद्र रही है, और उद्धव के लिए यहां अच्छी स्थिति बनाना आवश्यक है।


बीजेपी की चुनौती

मुंबई में बीजेपी बनी सबसे बड़ी चुनौती


पिछले एक दशक में मुंबई में बीजेपी की ताकत में लगातार वृद्धि हुई है। 2017 के बीएमसी चुनाव में बीजेपी ने अपने कॉर्पोरेटरों की संख्या 31 से बढ़ाकर 82 कर ली थी। 2024 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, ठाकरे बंधुओं के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी है।


कांग्रेस और अन्य दलों की भूमिका

कांग्रेस और अन्य दलों की भूमिका


बीएमसी में कांग्रेस का प्रभाव समय के साथ कमजोर हुआ है। कभी 51 कॉर्पोरेटर रखने वाली कांग्रेस 2017 में 31 सीटों तक सिमट गई थी। हालांकि, मुस्लिम और दलित मतदाताओं के समर्थन के चलते कांग्रेस-वंचित बहुजन आघाड़ी गठबंधन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मुख्य मुकाबला बीजेपी-शिंदे शिवसेना गठबंधन और ठाकरे बंधुओं के गठबंधन के बीच माना जा रहा है।


मतगणना की प्रतीक्षा

अब सभी की नजरें मतगणना पर हैं, जिसके बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि मुंबई की सत्ता किसके हाथ में जाती है और महाराष्ट्र की शहरी राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।