राजस्थान हाईकोर्ट की अनोखी पहल: ऑनलाइन सुनवाई से ईंधन की बचत
राजस्थान में ऊर्जा संरक्षण की दिशा में कदम
राजस्थान: देश में ईंधन की खपत में वृद्धि और ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अब केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि प्रमुख संवैधानिक संस्थाएं भी सक्रियता दिखा रही हैं। इसी क्रम में, राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और अभिनव कदम उठाया है। कोर्ट प्रशासन ने कुछ समय के लिए न्यायिक कार्यों को ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया है, जिससे अनावश्यक यात्रा कम हो सके और ईंधन की बचत हो।
ऑनलाइन सुनवाई की तारीखें
राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, जोधपुर मुख्य पीठ और जयपुर बेंच में 22, 26 और 27 मई को न्यायिक कार्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किए जाएंगे। इन तिथियों पर वकील, पक्षकार और अन्य संबंधित व्यक्ति अदालत की कार्यवाही में वर्चुअल रूप से भाग ले सकेंगे। कोर्ट प्रशासन ने इस निर्णय को ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण के हित में उठाया गया कदम बताया है। इसके साथ ही, अधिवक्ताओं और आम जनता से सहयोग की अपील की गई है ताकि यह पहल सफल हो सके।
प्रधानमंत्री की अपील का प्रभाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा बचत की अपील के बाद, कई सरकारी विभाग और संस्थाएं नए कदम उठा रही हैं। लोगों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, वाहन साझा करने और अनावश्यक ईंधन खर्च को कम करने की सलाह दी जा रही है। इसी दिशा में, राजस्थान हाईकोर्ट ने अपनी कार्यशैली में बदलाव करते हुए डिजिटल माध्यम को अपनाने का निर्णय लिया है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी।
जस्टिस समीर जैन का प्रेरणादायक कदम
राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जैन ने इस पहल को लेकर चर्चा में रहे। उन्होंने हाल ही में अपनी सरकारी कार का उपयोग छोड़कर साइकिल से अदालत पहुंचकर एक प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने गांधीनगर स्थित अपने निवास से लगभग पांच किलोमीटर का सफर साइकिल से तय किया, और इस दौरान किसी सुरक्षा काफिले का सहारा नहीं लिया। उनकी यह सादगी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
सरकारी कार्यशैली में बदलाव
देशभर में सरकारी कार्यप्रणाली में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है। कई अधिकारी और कर्मचारी अब छोटी दूरी के लिए निजी वाहनों की बजाय साइकिल, पैदल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर रहे हैं। सरकारी बैठकों और कार्यों में भी ऑनलाइन माध्यम को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे समय की बचत के साथ-साथ ईंधन की खपत भी कम हो रही है। राजस्थान हाईकोर्ट की यह पहल इसी बदलती सोच का हिस्सा मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अन्य संस्थाएं भी इसी तरह के छोटे-छोटे कदम उठाएं, तो देश में ऊर्जा संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।
