संभल में प्रशासन ने अवैध मदरसे को गिराया, जानें क्या है पूरा मामला?
संभल में अवैध निर्माण पर प्रशासन की कार्रवाई
संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के सलेमपुर सालार गांव में शुक्रवार को प्रशासन ने अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा कदम उठाया। गांव के मुख्य मार्ग पर स्थित एक अवैध मदरसे को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। यह मदरसा लगभग ढाई हजार वर्ग मीटर में फैला हुआ था और लंबे समय से विवादों में था। प्रशासन ने बताया कि विस्तृत जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह मदरसा पूरी तरह से अवैध तरीके से संचालित हो रहा था।
बेशकीमती भूमि पर अवैध कब्जा
अधिकारियों के अनुसार, जिस भूमि पर मदरसा स्थित था, उसकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई है। यह भूमि गांव के मुख्य सड़क मार्ग पर है और सरकारी रिकॉर्ड में इसे सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित किया गया है। जांच में पता चला कि लगभग 20 से 25 साल पहले इस भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण किया गया था। न तो भूमि का वैध आवंटन हुआ था और न ही निर्माण के लिए कोई अनुमति ली गई थी।
न रजिस्ट्रेशन, न स्वीकृत नक्शा
प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि मदरसा किसी भी सरकारी विभाग में पंजीकृत नहीं था। इसके पास न तो शिक्षा विभाग की मान्यता थी और न ही निर्माण से संबंधित कोई स्वीकृत नक्शा। इसके बावजूद, यहां वर्षों से धार्मिक और अन्य गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, जिसे अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन बताया।
कमर्शियल गतिविधियों का खुलासा
जांच के दौरान यह भी पता चला कि मदरसे के बाहरी हिस्से में कई दुकानें बनाई गई थीं, जो पूरी तरह से व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए उपयोग की जा रही थीं। इन दुकानों से किराया वसूला जाता था, जिससे मदरसे के नाम पर आर्थिक लाभ कमाया जा रहा था। ये दुकानें भी सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई थीं, इसलिए प्रशासन ने मदरसे के साथ-साथ सभी दुकानों को गिराने का निर्णय लिया।
सुरक्षा के बीच कार्रवाई
शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच बुलडोजर कार्रवाई शुरू की गई, ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या न हो। जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण बिश्नोई ने स्वयं मौके पर मौजूद रहकर पूरी कार्रवाई की निगरानी की।
पहले दिए गए थे नोटिस
जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि इस अवैध निर्माण को लेकर पहले ही कई बार नोटिस जारी किए जा चुके थे। अतिक्रमण हटाने के लिए समय भी दिया गया था, लेकिन संबंधित पक्ष की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके चलते प्रशासन को सख्त कदम उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि कानून के तहत अवैध कब्जा हटाना आवश्यक था।
अतिक्रमणकारियों पर जुर्माना
डीएम ने बताया कि इस मामले में धारा 67 के तहत मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। अब तक लगभग 58 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है और बुलडोजर कार्रवाई पर आने वाला खर्च भी अतिक्रमणकारियों से वसूला जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी जहां-जहां अवैध कब्जे मिलेंगे, वहां इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जमीन का सामाजिक उपयोग
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध कब्जा हटने के बाद इस भूमि का उपयोग गांव के गरीब और जरूरतमंद लोगों के हित में किया जाएगा। सरकार की योजना है कि इस भूमि से प्राप्त संसाधनों का इस्तेमाल सामाजिक और आर्थिक कल्याण के लिए किया जाए, ताकि गांव के विकास को गति मिल सके।
