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हरियाणा के किसानों के लिए राहत: मुख्यमंत्री ने ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल किया सक्रिय

हरियाणा के किसानों के लिए राहत की खबर आई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को सक्रिय किया है। किसानों को 15 अप्रैल तक अपने नुकसान का विवरण दर्ज करना होगा। बीमा रहित किसानों को भी सहायता मिलेगी। कुरुक्षेत्र के किसानों के लिए भी जल्द पोर्टल खोला जाएगा। जानें पूरी जानकारी इस लेख में।
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हरियाणा के किसानों के लिए राहत: मुख्यमंत्री ने ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल किया सक्रिय

मुख्यमंत्री ने लिया त्वरित कदम

सिरसा, 10 अप्रैल। हरियाणा के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत की सूचना आई है। हाल ही में हुई अप्रत्याशित बारिश और ओलावृष्टि ने सिरसा, हिसार और फतेहाबाद जैसे कई जिलों में गेहूं की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस प्राकृतिक आपदा के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए प्रभावित किसानों के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को सक्रिय कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकार हर एक दाने के नुकसान की भरपाई करेगी और किसानों को उचित मुआवजा समय पर प्रदान किया जाएगा।


पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 अप्रैल

सरकार ने विशेष निर्देश जारी किए हैं। सिरसा जिले की कालांवाली तहसील के गांव गदरणा, तारुआना और डबवाली के जोगेवाला, फूल्लो, हेबुआना के किसानों को 15 अप्रैल तक अपनी फसलों के नुकसान का विवरण पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य है। किसान अपने नजदीकी सीएससी (CSC) केंद्र पर जाकर या स्वयं पोर्टल पर फसल नुकसान की तस्वीरों के साथ आवेदन कर सकते हैं। समय सीमा समाप्त होने के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे, इसलिए किसानों को तुरंत सक्रिय होना आवश्यक है।


बीमा रहित किसानों के लिए राहत की योजना

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं उठाया है, उन्हें भी ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल के माध्यम से सरकारी सहायता मिलेगी। आवेदन के बाद कृषि विभाग की विशेष टीमें गांवों में जाकर भौतिक सत्यापन करेंगी। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।


कुरुक्षेत्र के किसानों के लिए नया पोर्टल

कुरुक्षेत्र के किसानों के लिए भी अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जल्द ही कुरुक्षेत्र जिले का पोर्टल भी सक्रिय किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि कटाई के मौसम से पहले मुआवजे की प्रक्रिया को तेज किया जाए ताकि किसानों को आर्थिक संकट से उबारा जा सके। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पंजीकरण के समय अपनी भूमि और नुकसान की सही जानकारी साझा करें ताकि सर्वे टीम को आकलन करने में आसानी हो।


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