हरियाणा सरकार ने सूक्ष्म और लघु उद्यमियों के लिए औद्योगिक कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया को सरल बनाया
मुख्यमंत्री नायब सैनी की नई पहल
चंडीगढ़, 14 अप्रैल। हरियाणा सरकार ने प्रदेश के सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को एक महत्वपूर्ण सौगात दी है। मुख्यमंत्री नायब सैनी की बजट घोषणा के अनुसार, अनधिकृत औद्योगिक कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। नए निर्देशों के तहत, जिन क्षेत्रों में कम से कम 10 एकड़ भूमि पर 50 उद्यमी कार्यरत हैं, उन्हें नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU) की आवश्यकता नहीं होगी। यह निर्णय पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे औद्योगिक केंद्रों पर सीधा प्रभाव डालेगा।
बजट में किया गया वादा
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने वित्त मंत्री के रूप में 2025-26 का वार्षिक बजट पेश करते समय इन कॉलोनियों को नियमित करने का आश्वासन दिया था। अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक किसी कॉलोनी के आवेदन पर अंतिम निर्णय नहीं होता, तब तक उसे वैध माना जाएगा। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि उद्यमियों को सीवरेज, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रशासनिक देरी के कारण काम रुकने की संभावना नहीं रहेगी, क्योंकि सरकार आवेदन लंबित रहने के दौरान भी सुविधाएं प्रदान करेगी।
नियमों में बदलाव और आवेदन प्रक्रिया
उद्योग और वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने हरियाणा उद्यम एवं रोजगार नीति की 16 प्रोत्साहन योजनाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब 1 जनवरी 2021 से पहले उत्पादन शुरू करने वाले सभी उद्योग इन सरकारी योजनाओं के लिए पात्र होंगे। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) के साथ-साथ नई मेगा परियोजनाएं भी शामिल हैं। स्थानीय उद्यमियों के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे इंस्पेक्टर राज और तकनीकी जटिलताओं से राहत मिलेगी।
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
सरकार ने प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक विशेष पोर्टल लॉन्च किया है। उद्यमियों को सामूहिक रूप से इस पोर्टल पर नियमितीकरण के लिए आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान 25 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से स्क्रूटनी शुल्क देना अनिवार्य होगा। इस कदम से औद्योगिक क्षेत्रों का व्यवस्थित विकास होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। औद्योगिक क्लस्टर्स में इस छूट से हरियाणा के औद्योगिक उत्पादन में तेजी आने की संभावना है।
