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अधिकमास: 17 मई से 15 जून तक, इन कार्यों से बचें

अधिकमास, जो 17 मई से 15 जून तक रहेगा, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा का महत्व है, लेकिन कुछ कार्यों से बचना चाहिए। जानें कि इस महीने में किन कार्यों को करने से मना किया गया है और क्या करना चाहिए।
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अधिकमास: 17 मई से 15 जून तक, इन कार्यों से बचें

भगवान विष्णु को समर्पित यह महीना


अधिकमास का महत्व
अधिकमास, जिसे 13 महीनों का साल माना जाता है, सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इसे भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है। हर तीसरे वर्ष में एक अधिकमास आता है, जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है। इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा और व्रत का विशेष महत्व है, और इस दौरान किए गए दान का फल भी विशेष माना जाता है।


इस वर्ष, अधिकमास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। इस दौरान पूजा-पाठ और व्रत का महत्व है, लेकिन कुछ कार्यों को करने से मना किया गया है। आइए जानते हैं कि अधिकमास में किन कार्यों से बचना चाहिए।


अधिकमास में न करें ये काम


  • इस महीने में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार और सगाई नहीं करनी चाहिए। मान्यता है कि इन कार्यों का शुभ फल नहीं मिलता।

  • यदि आप नया कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं, तो इसे अधिकमास के बाद ही करें। इस दौरान नया कारोबार शुरू करने से असफलता की संभावना अधिक होती है।

  • नए घर की नींव रखना या नए घर में प्रवेश करना भी इस समय शुभ नहीं माना जाता। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश कर सकती है।

  • अधिकमास में मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। इस महीने में सात्विक जीवन जीने की सलाह दी जाती है।

  • इस दौरान जमीन, सोना, नई गाड़ी या अन्य महंगी चीजें खरीदना भी अशुभ माना जाता है।

  • अधिक गुस्सा करने और झूठ बोलने से बचें, और किसी का अपमान न करें।