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कृष्ण के मथुरागमन की कथा: वीरता और बलिदान का संदेश

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में साध्वी वैष्णवी भारती जी ने भगवान श्रीकृष्ण के मथुरागमन की लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कैसे कंस के आदेश पर अक्रूर जी ने कन्हैया और दाऊ जी को मथुरा ले जाने का कार्य किया। कथा में वीरता और बलिदान के महत्व पर भी चर्चा की गई, जिसमें बताया गया कि देश की रक्षा करना हिंसा नहीं, बल्कि वीरता का प्रतीक है। इस कथा में कई गणमान्य लोग उपस्थित थे और अंत में कथा व्यास को सम्मानित किया गया।
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कृष्ण के मथुरागमन की कथा: वीरता और बलिदान का संदेश

श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन

होशियारपुर: दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा रोशन ग्राउंड में 14 से 20 अप्रैल तक आयोजित श्रीमद् भागवत साप्ताहिक कथा ज्ञानयज्ञ के छठे दिन, साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी ने भगवान श्रीकृष्ण के मथुरागमन की लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कंस के आदेश पर अक्रूर जी ने कन्हैया और दाऊ जी को मथुरा ले जाने के लिए वृंदावन की ओर प्रस्थान किया।


इस समाचार ने पूरे गाँव में हलचल मचा दी कि कन्हैया हम सबको छोड़कर जा रहे हैं। सभी लोग नंद बाबा के आंगन में एकत्रित हो गए और भावुक विदाई दी। गलियाँ, जो कभी खुशी से भरी थीं, आज उदासी में डूबी थीं। गाँव में एक गहरी पीड़ा का अनुभव किया जा रहा था।


प्राणहीन शरीर की स्थिति क्या हो सकती है? जब आत्मा निकल जाती है, तो जीवित रहना संभव नहीं होता। श्रीकृष्ण के जाने से पूरा गाँव शून्य हो गया।


जब अक्रूर जी उन्हें रथ पर बैठाकर मथुरा ले गए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना के लिए मथुरा की ओर प्रस्थान किया। उन्होंने कंस का वध कर एक निरंकुश राजा की सत्ता को समाप्त किया।


वर्षों पहले की गई आकाशवाणी कि देवकी के आठवें गर्भ की संतान कंस का काल होगी, आज सत्य सिद्ध हुई। हर ओर एक ही स्वर गूंज रहा था, “सत्यमेव जयते”। एक पापी का अंत हुआ और धर्म, न्याय एवं सत्य की स्थापना हुई।


भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर मथुरा का राज्य उग्रसेन को सौंपा। भौमासुर के बाद उसके पुत्र भगदत्त को सिंहासन पर बैठाया।
आज हमारे सैनिक भी सीमा की रक्षा कर रहे हैं। यह कार्य हिंसा नहीं, बल्कि शौर्य का प्रतीक है। गीता में कहा गया है कि जो देश के लिए शहीद होगा, उसे स्वर्ग की प्राप्ति होगी।


श्रीकृष्ण हमें अपने आदर्शों के प्रति संकल्पित रहने की प्रेरणा देते हैं, जैसे हमारे देश के क्रांतिकारियों ने किया। भारत की मिट्टी उन शहीदों के रक्त से पवित्र है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।


कथा की शुरुआत मुख्य यजमान मनीष गुप्ता, कुशा गुप्ता, राहुल गुप्ता और अन्य ने परिवार सहित भागवत पूजन कर की।


इस कथा में डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा, पूर्व विधायक पवन आदिया, म्यूजिक कंपोजर सचिन आहूजा और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। अंत में गोपी चंद कपूर और दीपक मेंहदीरत्ता ने कथा व्यास और उनकी टीम को सम्मानित किया।