गंगा सप्तमी: महत्व और घर लाने योग्य पवित्र वस्तुएं
गंगा सप्तमी का महत्व
हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। यह पर्व वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान और दान करने से व्यक्ति के पिछले जन्मों के पाप धुलने का विश्वास है। इस वर्ष गंगा सप्तमी 23 अप्रैल 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।
गंगा सप्तमी पर घर लाने योग्य वस्तुएं
गंगा सप्तमी के दिन केवल स्नान करना ही नहीं, बल्कि कुछ विशेष पवित्र वस्तुओं को अपने घर लाना भी शुभ माना जाता है। इससे मां गंगा प्रसन्न होती हैं और महादेव की कृपा बनी रहती है। आइए जानते हैं कि कौन सी वस्तुएं आपके भाग्य को जागृत कर सकती हैं।
चांदी या तांबे के पात्र में गंगाजल
गंगा सप्तमी पर पवित्र गंगाजल लाना सबसे शुभ माना जाता है। यदि यह संभव न हो, तो पहले से उपलब्ध गंगाजल को तांबे या चांदी के स्वच्छ पात्र में भरकर घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में स्थापित करें। इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है और सुख-शांति का आगमन होता है।
दक्षिणवर्ती शंख
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शंख को मां लक्ष्मी का भाई माना जाता है। इसलिए गंगा सप्तमी के दिन दक्षिणवर्ती शंख खरीदकर घर लाना और उसे पूजा स्थल पर स्थापित करना बहुत शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि जहां शंख की ध्वनि होती है, वहां दरिद्रता का प्रवेश नहीं होता।
कमल या हाथी की प्रतिमा
गंगा सप्तमी के दिन कमल का फूल और चांदी का हाथी लाना चाहिए। मां गंगा को कमल का फूल प्रिय है और हाथी ऐश्वर्य का प्रतीक है। इससे करियर और व्यापार में सफलता मिलती है और सौभाग्य के द्वार खुलते हैं।
रुद्राक्ष
यह मान्यता है कि मां गंगा भगवान शिव की जटाओं में निवास करती हैं। इसलिए गंगा सप्तमी के दिन रुद्राक्ष लाना, धारण करना या पूजास्थल में स्थापित करना अत्यंत शुभ होता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और आंतरिक शांति का अनुभव होता है।
गंगा सप्तमी पूजा मंत्र
- ॐ गंगे नमः॥
- गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
- नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः॥
